नेताओं की संपत्ति का हिसाब तो अफसरों का क्यों नहीं?

New Delhi

पूर्व IPS किरण बेदी की मांग ने छेड़ी बड़ी बहस

New Delhi: पूर्व IPS अधिकारी और देश की पहली महिला IPS अधिकारियों में शामिल किरण बेदी ने दिल्ली हाईकोर्ट में मौजूदा और पूर्व विधायकों, पार्षदों तथा एमसीडी अधिकारियों की संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक किए जाने की मांग की है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों के साथ उनके परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज संपत्तियों की जानकारी भी सार्वजनिक करने की मांग उठाई है। हाईकोर्ट में उनकी इस मांग के बाद पूरे देश में चर्चा छिड़ गई है कि क्या दिल्ली म्युनिसिपल कॉरपोरेशन में कितना भ्रष्टाचार प्राप्त है?

किरण बेदी की इस मांग ने पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि अगर जनप्रतिनिधियों की संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक करने की जरूरत है तो सरकारी विभागों में महत्वपूर्ण पदों पर तैनात और रह चुके अधिकारियों की संपत्तियों को भी जांच के दायरे में क्यों नहीं लाया जाना चाहिए? सिर्फ नेता क्यों, अफसर भी आएं दायरे में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए ऐसी व्यवस्था की जरूरत पूरे देश में महसूस की जा रही है, जिसमें केवल सांसद, विधायक या पार्षद ही नहीं, बल्कि सरकारी अधिकारी भी पारदर्शिता के दायरे में हों। खासकर उन अधिकारियों की संपत्तियों और उनके परिवार के नाम दर्ज संपत्तियों की जानकारी की नियमित जांच की व्यवस्था होनी चाहिए, जिनके पास लंबे समय तक महत्वपूर्ण प्रशासनिक या वित्तीय जिम्मेदारियां रही हैं।

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यहां एक राजनीतिक सवाल भी खड़ा होता है। किरण बेदी ने अब जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की संपत्तियों को सार्वजनिक करने की मांग उठाई है, लेकिन आलोचक यह सवाल उठा सकते हैं कि सरकारी सेवा में रहते हुए ऐसी मांग को लेकर उनकी आवाज उतनी मुखर क्यों नहीं दिखाई दी? हालांकि किसी व्यक्ति के पूर्व पद पर रहते हुए किसी विशेष पहल के अभाव को भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

दिल्ली की राजनीति से राष्ट्रीय बहस तक किरण बेदी का राजनीतिक सफर भी काफी चर्चित रहा है। वर्ष 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया था और उनका सीधा राजनीतिक मुकाबला अरविंद केजरीवाल से था। उस दौर में बेदी की राजनीतिक भूमिका को लेकर देशभर में चर्चा हुई थी। लेकिन राजनीति से अलग उनकी पहचान एक चर्चित पुलिस अधिकारी और सार्वजनिक जीवन में महिला नेतृत्व के प्रतीक के तौर पर भी रही है। उनकी मौजूदा मांग को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।

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