
Manas Garden में स्वतंत्रता दिवस समारोह धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन मानस गार्डन वेलफेयर सोसायटी की ओर से किया गया। समारोह में उत्तर प्रदेश उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष अमरजीत त्रिपाठी मुख्य अतिथि रहे, जबकि अपर जिला जज चंद्रमोहन चतुर्वेदी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम की एंकरिंग पूर्व उपाध्यक्ष चंचल सिंह ने की। समारोह के दौरान देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रमों के साथ सामाजिक सरोकारों पर भी वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
इस अवसर पर आलोक सक्सेना ने मातृशक्ति की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि महिलाओं को आगे आकर देश, शहर और अपनी कॉलोनी के विकास में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज भी समाज में कुछ लोग महिलाओं को घर तक सीमित रखना चाहते हैं, जबकि बदलते दौर में महिलाओं की सहभागिता बेहद जरूरी है। आलोक सक्सेना की बात का समर्थन करते हुए, अमरजीत त्रिपाठी ने कहा कि मातृशक्तियां किसी भी क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर सकती हैं। उन्होंने गया में पिंडदान से जुड़ी पौराणिक कथा का उदाहरण देते हुए मातृशक्ति की सामर्थ्य और निर्णय क्षमता पर प्रकाश डाला।
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वहीं डॉ. ज्योति ने स्वच्छता, स्वतंत्रता और स्वच्छंदता के बीच अंतर को रेखांकित किया। उन्होंने बच्चों को मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बच्चे लगातार मोबाइल पर रील देखते हुए स्क्रॉल करने में अपना कीमती समय बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने बच्चों से मोबाइल के बजाय पढ़ाई, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों पर ध्यान देने का आह्वान किया। समारोह के दौरान उपस्थित लोगों ने देश की एकता, स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति अपने संकल्प को दोहराया। कार्यक्रम का समापन सोसायटी के सचिव रवींद्र प्रजापति के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

क्या है गया में पिंडदान की कथा…
जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के दौरान गया पहुंचे, तब राजा दशरथ की आत्मा ने सीता से पिंडदान की इच्छा प्रकट की। उस समय श्रीराम और लक्ष्मण पिंडदान की सामग्री लाने गए थे। प्रतीक्षा अधिक होने पर सीता जी ने फल्गु नदी के किनारे की रेत से पिंड बनाकर अपने ससुर राजा दशरथ का श्राद्ध और पिंडदान कर दिया।

बाद में जब श्रीराम लौटे, तो उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि पिंडदान हो चुका है। तब सीता जी ने साक्षी के रूप में फल्गु नदी, एक गाय, एक ब्राह्मण, एक तुलसी का पौधा और अक्षयवट (बरगद का वृक्ष) को बुलाया। इनमें केवल अक्षयवट ने सत्य की पुष्टि की कि सीता जी ने पिंडदान किया है। इससे प्रसन्न होकर सीता जी ने अक्षयवट को अमर रहने का वरदान दिया, जबकि अन्य साक्षियों को असत्य बोलने के कारण शाप दिया। इसी कारण बोधगया में अक्षयवट का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है और गया को पितरों के श्राद्ध एवं पिंडदान का सर्वोच्च तीर्थ माना जाता है।
कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने देशभक्ति गीतों की सुंदर प्रस्तुति दी। विशेष रूप से सुधा मिश्रा, गरिमा सिंह, गुंजन श्रीवास्तव एवं अन्य महिलाओं ने उनकी प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को देशभक्ति और उत्साह से भर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित अनेक गणमान्य सदस्यों एवं अन्य लोगों ने भी देशभक्ति गीतों में उत्साहपूर्वक सहभागिता की और इस सुंदर प्रस्तुति की सराहना की।
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