
Chaudhary Sunil Singh: लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी सुनील सिंह ने संसद की कार्यप्रणाली और जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में केवल सांसदों की संख्या बढ़ाना समाधान नहीं है, बल्कि जरूरी यह है कि संसद में चुने गए प्रतिनिधियों की बात सुनी जाए और जनता से जुड़े विषयों पर गंभीर चर्चा हो।
चौधरी सुनील सिंह ने कहा कि मौजूदा संसद में 543 सांसदों की आवाज अगर प्रभावी ढंग से नहीं सुनी जा रही है, तो सांसदों की संख्या बढ़ाकर 850 किए जाने से भी समस्या का समाधान कैसे होगा। उन्होंने कहा कि संसद को किसान, मजदूर, बेरोजगार युवा, रोजगार, महंगाई, ग्रामीण विकास और आम लोगों की आर्थिक परेशानियों जैसे मुद्दों पर केंद्रित होना चाहिए।
संसद में व्यवधान और खर्च को लेकर सवाल
लोकदल अध्यक्ष ने संसद के कामकाज में व्यवधान के कारण होने वाले कथित आर्थिक नुकसान को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि संसद का संचालन जनता के पैसे से होता है। ऐसे में यदि कामकाज प्रभावित होने से करोड़ों रुपये का नुकसान होता है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
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उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि जनता के धन से होने वाले नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी किसकी होगी। चौधरी सुनील सिंह ने कहा कि संसद के समय और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।
FCRA विधेयक पर सरकार से स्पष्टीकरण की मांग
प्रेस वार्ता के दौरान FCRA से जुड़े विधेयक पर भी उन्होंने सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने सवाल किया कि कानून में बदलाव की जरूरत क्यों महसूस हुई और इसके पीछे सरकार की क्या वजह है। उन्होंने आरोप लगाया कि बदलाव को लेकर बाहरी दबाव की बात सामने आ रही है। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की स्थिति जनता के सामने स्पष्ट करने की मांग की।
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महिलाओं को आर्थिक सहायता के वादे पर सवाल
महिलाओं को सालाना 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने से जुड़े चुनावी वादे पर भी चौधरी सुनील सिंह ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने की ऐसी योजना संभव है, तो इसे पहले भी लागू किया जा सकता था।
उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि चुनावी घोषणाओं के तहत किए गए ऐसे वादों का वास्तविक लाभ कितनी महिलाओं तक पहुंचा है। उनके मुताबिक, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की योजनाओं में पारदर्शिता और उनके क्रियान्वयन का सार्वजनिक हिसाब होना चाहिए।
जनता के मुद्दे संसद की पहली प्राथमिकता हों
चौधरी सुनील सिंह ने कहा कि संसद लोकतंत्र में जनता की आवाज उठाने का सबसे महत्वपूर्ण मंच है। किसान, मजदूर, महिला, युवा और आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी बहस और समाधान की दिशा में कार्रवाई होनी चाहिए।
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