जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड की रिपोर्ट लोकसभा में पेश, जांच में साजिश के संकेत नहीं

Yashwant Verma Cash Scandal

Yashwant Verma Cash Scandal: पूर्व न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड की जांच रिपोर्ट लोकसभा में पेश। समिति ने साजिश के संकेत नहीं मिलने की बात कही, लेकिन नकदी मिलने को गंभीर मामला माना।के सरकारी आवास से बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के मामले में गठित जांच समिति की रिपोर्ट बुधवार को लोकसभा में पेश कर दी गई। संसद के मॉनसून सत्र के समापन से एक दिन पहले रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी गई। रिपोर्ट में जांच समिति ने कहा है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किसी साजिश के संकेत नहीं मिले हैं। हालांकि, न्यायाधीश के आवास में इतनी बड़ी मात्रा में नकदी का पाया जाना गंभीर मामला है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

न्यायाधीश जांच अधिनियम के तहत हुई जांच

तीन सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत तैयार की। जांच के दौरान दर्ज किए गए मौखिक बयानों, दस्तावेजी साक्ष्यों और अन्य उपलब्ध तथ्यों को रिपोर्ट में शामिल किया गया है।

सूत्रों के अनुसार, समिति ने अपनी जांच पूरी करने के बाद मई 2026 में ही रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंप दी थी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूछताछ के दौरान जस्टिस वर्मा कई सवालों के स्पष्ट जवाब देने से बचते हुए दिखाई दिए।

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ओम बिरला ने गठित की थी तीन सदस्यीय समिति

जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अगस्त 2025 में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अरविंद कुमार ने की।

समिति में बॉम्बे हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य को भी शामिल किया गया था। समिति को मामले से जुड़े आरोपों, परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों की विस्तृत जांच करनी थी।

आग लगने के बाद सामने आया था कैश कांड

मामला 14 मार्च 2025 की रात सामने आया था। दिल्ली स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास में आग लगने के बाद दमकलकर्मी वहां पहुंचे थे। आग बुझाने के दौरान परिसर के एक स्टोर रूम से अधजली और बिना जली नकदी मिलने की बात सामने आई।

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उस समय जस्टिस वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीश के पद पर थे। मामला सामने आने के बाद उन्हें उनके मूल कैडर इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया गया था। बाद में उन्होंने न्यायाधीश पद से इस्तीफा दे दिया।

पहले भी हुई थी आंतरिक जांच

इस मामले में तत्कालीन CJI संजीव खन्ना द्वारा गठित आंतरिक न्यायिक समिति ने भी जांच की थी। उस समिति ने पाया था कि जिस स्टोर रूम से नकदी बरामद हुई, उस पर जस्टिस वर्मा का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण था।

इसके बाद मामले ने राजनीतिक और न्यायिक दोनों स्तरों पर गंभीर रूप ले लिया। जुलाई 2025 में 200 से अधिक सांसदों ने जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए प्रस्ताव पेश किया था। इसी के बाद वैधानिक जांच समिति की कार्रवाई आगे बढ़ी। जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया था और पूरे मामले को साजिश बताया था। अब लोकसभा में पेश की गई जांच रिपोर्ट ने साजिश के दावे को लेकर अलग निष्कर्ष सामने रखा है।

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