
Dharmendra Pradhan’s resignation : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। इस्तीफे की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का साल 2015 का एक पुराना वीडियो तेजी से वायरल होने लगा। इस वीडियो में राजनाथ सिंह यह कहते सुनाई देते हैं कि “मंत्रियों के त्यागपत्र नहीं होते हैं भैया, ये UPA सरकार नहीं है, NDA सरकार है।” मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम के बाद इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब NEET परीक्षा विवाद, पेपर लीक के आरोप और छात्रों के लगातार विरोध-प्रदर्शनों को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा था। विपक्ष लंबे समय से शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करने और उनके इस्तीफे की मांग कर रहा था। अब उनके पद छोड़ने के बाद विपक्ष इसे अपनी राजनीतिक जीत बता रहा है, जबकि सरकार की ओर से इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
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सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा राजनाथ सिंह का वीडियो 24 जून 2015 की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का बताया जा रहा है। उस दौरान उन्होंने विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि एनडीए सरकार में मंत्रियों के इस्तीफे की परंपरा नहीं है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब इसी बयान को शेयर करते हुए कई यूजर्स मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी कर रहे हैं। हालांकि, यह वीडियो पुराना है और उस समय की राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़ा हुआ था।
गौरतलब है कि मोदी सरकार के लंबे कार्यकाल में केंद्रीय मंत्रियों के इस्तीफे के मामले बेहद कम देखने को मिले हैं। इससे पहले वर्ष 2018 में तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री M.J. अकबर ने #MeToo अभियान के दौरान लगे आरोपों के बाद अपने पद से इस्तीफा दिया था। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हाल के वर्षों में केंद्र सरकार के सबसे चर्चित राजनीतिक घटनाक्रमों में शामिल माना जा रहा है।
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पिछले कई दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र और विभिन्न संगठन NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। इस आंदोलन को कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों का समर्थन भी मिला। लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनके अनशन समाप्त होने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई थी कि सरकार शिक्षा मंत्रालय में बड़ा फैसला ले सकती है।
विपक्ष लगातार शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग कर रहा था। इसी बीच छात्रों के आंदोलन के दौरान कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए और राजनीतिक दलों ने भी सरकार को घेरने की कोशिश की। सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कई कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की, लेकिन छात्रों का विरोध जारी रहा। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब राजनीतिक गलियारों में आगे की रणनीति और शिक्षा मंत्रालय में नए नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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