
up mango export crisis : उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद के आम देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में अपनी मिठास और गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध हैं। दशहरी आम की पहचान मलिहाबाद से जुड़ी हुई है और हर साल हजारों टन आम विदेशों में निर्यात किए जाते हैं। लेकिन इस बार हालात अलग हैं। जापान और अमेरिका जैसे बड़े बाजारों ने भारतीय आमों को लेने से इनकार कर दिया है, जिससे किसानों और निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है।
जापान और अमेरिका ने क्यों रोका आमों का आयात?
किसानों और निर्यातकों के अनुसार इस बार आम की फसल कई चुनौतियों से गुजरी है। मौसम में अचानक बदलाव, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण फलों की गुणवत्ता प्रभावित हुई। इसके बाद आमों को कीटों से बचाने के लिए किसानों को अधिक मात्रा में कीटनाशकों का उपयोग करना पड़ा।
यही अतिरिक्त कीटनाशक अब निर्यात के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन गए हैं। जापान खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर बेहद सख्त माना जाता है। वहां भेजे जाने वाले फलों में कीटनाशक अवशेष निर्धारित सीमा से अधिक नहीं होने चाहिए। रिपोर्ट्स के अनुसार निरीक्षण के दौरान कुछ खामियां सामने आने के बाद जापान ने आम लेने से मना कर दिया।
मलिहाबाद के किसानों को बड़ा नुकसान
मलिहाबाद के कई किसान वर्षों से जापान और अमेरिका में आम निर्यात कर रहे हैं। किसानों ने इस साल भी निर्यात की तैयारी में भारी निवेश किया था। कई बागवानों ने आमों को कीटनाशकों से बचाने के लिए हर फल पर विशेष पैकेट लगाए और अतिरिक्त श्रमिकों की मदद ली। लेकिन जब निर्यात के ऑर्डर रुक गए तो किसानों को बड़ा आर्थिक झटका लगा। जो आम विदेशों में 150 रुपये प्रति किलो तक बिकते थे, वही अब स्थानीय मंडियों में 28 से 35 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेचने पड़ रहे हैं।
पद्मश्री कलीमुल्ला खान ने जताई चिंता
मलिहाबाद के प्रसिद्ध आम विशेषज्ञ और पद्मश्री सम्मानित कलीमुल्ला खान का कहना है कि बाजार में नकली और अत्यधिक प्रभाव वाले कीटनाशकों की उपलब्धता भी एक बड़ी समस्या है। उनका मानना है कि किसानों को वैज्ञानिक और सुरक्षित खेती के तरीकों की ओर बढ़ना होगा, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय आमों की साख बनी रहे। उन्होंने यह भी कहा कि जापान खाद्य गुणवत्ता को लेकर बेहद सतर्क है, इसलिए वहां के नियमों का पालन करना जरूरी है।
निर्यात से पहले कैसे होता है आमों का ट्रीटमेंट?
विदेश भेजने से पहले आमों का विशेष उपचार किया जाता है जिसे वेपर हीट ट्रीटमेंट (VHT) कहा जाता है। इस प्रक्रिया में आमों को नियंत्रित तापमान वाले चैंबर में रखा जाता है, जिससे फल के अंदर मौजूद कीट और लार्वा नष्ट हो जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार हाल ही में जापानी निरीक्षण टीम ने भारत के विभिन्न पैक हाउस और ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान कुछ तकनीकी कमियां सामने आने के बाद आयात पर रोक लगाने का फैसला लिया गया।
वैश्विक परिस्थितियों का भी असर
आम निर्यात पर केवल गुणवत्ता संबंधी मुद्दों का असर नहीं पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और परिवहन लागत में वृद्धि के कारण निर्यातकों की लागत बढ़ गई है। खाड़ी देशों और यूरोप तक आम पहुंचाना पहले की तुलना में अधिक महंगा हो गया है, जिससे व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक
भारत दुनिया में आम उत्पादन के मामले में पहले स्थान पर है। वैश्विक उत्पादन का लगभग 40 से 45 प्रतिशत हिस्सा भारत में होता है। उत्तर प्रदेश में करीब 2.8 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में आम की खेती की जाती है और हर साल लाखों टन उत्पादन होता है। मलिहाबाद, माल और काकोरी क्षेत्र दशहरी आम के लिए विशेष पहचान रखते हैं। ऐसे में निर्यात में आई यह गिरावट किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
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