परशुराम द्वादशी आज: जानें पूजा विधि व शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

Untitled 12 copy

राजेन्द्र गुप्ता

हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को परशुराम द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के छठवें अवतार परशुराम जी की पूजा की जाती है। परशुराम द्वादशी व्रत भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम को समर्पित है। वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को परशुराम द्वादशी व्रत मनाया जाता है। इस दिन कई भक्त कठोर व्रत रखते हैं। मोहिनी एकादशी के अगले दिन परशुराम व्रत मनाया जाता है। शास्त्रों में इस व्रत को बहुत फलदायी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार अगर ऐसा कहा जाता है कि वे दम्पती जो संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं, परन्तु इसमें विलम्ब हो रहा है, तो उन्हें इस दिन व्रत और पूजन अवश्य करना चाहिए।

क्यों मनाई जाती है परशुराम द्वादशी

हिन्दू धर्म पुराणों में उल्लेख मिलता है कि परशुराम द्वादशी के दिन भगवान शिव ने परशुरामजी को पृथ्वी पर बढ़ रहे अधर्म का नाश करने के लिए दिव्य परशु अस्त्र प्रदान किया था। मान्यता है कि धरती ने अपने लोगों पर हो रहे अनाचार से रक्षा करने के लिए भगवान विष्णु से विनती की थी। इसके फलस्वरूप उन्होंने अक्षय तृतीया के दिन ऋषि जमदग्नी और रेणुका के पुत्र परशुराम के रूप में धरती पर जन्म लिया। आगे चलकर परशुराम ने भगवान शिव की घोर तपस्या की और उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर, भगवान शिव ने उन्हें भार्गवास्त्र (परशु) प्रदान किया, जिससे उन्होंने हैहयवंशी राजाओं का संहार किया। कहा जाता है कि इसके बाद परशुराम ने कई वर्षों तक महेन्द्रगिरि पर्वत पर तपस्या की थी।

ये भी पढ़ें

मंगलवार के दिन इन राशियों को मिलेगा कारोबार में बड़ा लाभ…जानें आज का राशिफल

परशुराम द्वादशी व्रत का महत्त्व

इस दिन भक्त कठोर व्रत रखते हैं। शास्त्रों में इस व्रत को अधिक फलदायी माना गया है। मान्यता के अनुसार अगर किसी दंपत्ति को संतान प्राप्ति की इच्छा हो तो उन्हें यह व्रत अवश्य करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बता दें कि वैशाख शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को धरती माता भगवान विष्णु ने धरती पर फैली बुराई को समाप्त करने के लिए परशुराम अवतार लिया था।

परशुराम द्वादशी की पूजा विधि

  • परशुराम द्वादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना करें और व्रत का संकल्प लें ।
  • संकल्प लेने के बाद एक लकड़ी के चौकी पर रखकर लाल कपड़ा बिछाकर, भगवान विष्णु या परशुराम की तस्वीर या मूर्ति को स्थान दें ।
  • गंगा जल या किसी शुद्ध जल से चित्र या मूर्ति का अभिषेक करें।
  • अब पंचोपचार पूजा करें. अर्थात पूजन धूप, गंध, पुष्प, कुंकु, नैवैद्य आदि से करें।
  • फिर अंत में आरती करें और सबको प्रसाद बाटें ।
  • संध्या में भी पूजा करें ।
  • इस व्रत का पारण अगले दिन सुबह पूजा के बाद किया जाता है।

यदि परशुराम द्वादशी गुरुवार को पड़े तो भगवान विष्णु की पूजा और गुरुवार का व्रत एक साथ किया जा सकता है। बस इस बात का ध्यान रखें कि इस दिन नमक नहीं खाया जाता है।


नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें  

खबरों में अपडेट रहना हमारी आदत है और सबसे आगे रहना मेरा जुनून। अब नया लुक ऐप भी ले आया है। आप सभी से अनुरोध है कि आप इसे अपना प्यार, दुलार और आशीर्वाद दें। आप सभी से निवेदन है कि मेरा न्यूज ऐप अपने अपने फोन में इंस्टॉल कर लीजिए। मैं आप सभी का आभारी रहूंगा…. https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.nayalooknews

 

Spread the love

Lucknow
homeslider Uttar Pradesh

उत्तर प्रदेश में संपत्तियों की पहचान और नामांतरण प्रक्रिया होगी आसान

अब रजिस्ट्री के बाद स्वतः होगा नामांतरण यूपी में प्रॉपर्टी आईडी और ऑनलाइन सत्यापन पर जोर नगर निकायों में ई-नगरसेवा पोर्टल पर 56.57 लाख संपत्तियां पोर्टल पर दर्ज Lucknow: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में संपत्ति संबंधी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, सरल और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की […]

Spread the love
Read More
Lucknow
homeslider Politics Uttar Pradesh

यूपी वोटर लिस्ट में अनुवाद की गलती पर विवाद

वोटर लिस्ट विवाद पर यूपी CEO का विवादित बयान Lucknow: उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में नामों के गलत अनुवाद का मामला सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। विधान परिषद चुनाव की वोटर लिस्ट में ‘रामहित यादव’ का नाम कथित तौर पर गलत अनुवाद के कारण ‘राम ने यादव को मारा’ दर्ज […]

Spread the love
Read More
Kanpur
homeslider Uttar Pradesh

महर्षि वाल्मीकि आश्रम में CM योगी ने की पूजा-अर्चना

महर्षि वाल्मीकि को नमन, वैदिक मंत्रों से CM योगी का स्वागत Kanpur: महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कानपुर के बिठूर स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और महर्षि वाल्मीकि को श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया। इस दौरान दो महंतों ने पूजन संपन्न कराया। लव-कुश आश्रम […]

Spread the love
Read More