बंगाल चुनाव में हिंसा के साये में वोटिंग, वॉर रूम में डटे अमित शाह
बंगाल चुनाव 2026 का पहला चरण बेहद तनावपूर्ण माहौल में जारी है। लोकतंत्र के इस अहम पर्व के दौरान जहां मतदाता बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं, वहीं कई इलाकों से हिंसा और टकराव की खबरें सामने आने से चुनावी माहौल पर सवाल उठने लगे हैं। सियासी पारा अपने चरम पर है और सभी दल अपनी-अपनी जीत को लेकर पूरी ताकत झोंक रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश कार्यालय में बने हाईटेक ‘वॉर रूम’ पहुंचे। यहां उन्होंने करीब एक घंटे तक राज्यभर से मिल रही मतदान रिपोर्ट, बूथ स्तर की जानकारी और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। यह वॉर रूम आधुनिक तकनीक से लैस है, जहां से हर जिले की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। शाह की सक्रियता ने साफ कर दिया है कि पार्टी इस चुनाव को किसी भी हालत में हल्के में नहीं ले रही।
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कई जिलों में हिंसा, उम्मीदवारों पर हमले
पहले चरण की वोटिंग के दौरान कई जिलों से हिंसा की घटनाएं सामने आईं। मुर्शिदाबाद के रेजीनगर में AJUP उम्मीदवार हुमायूं कबीर के काफिले पर हमला हुआ, जिसमें भीड़ ने उनकी गाड़ी को घेरकर ईंट-पत्थरों और लाठी-डंडों से तोड़फोड़ की। कूचबिहार में कथित तौर पर अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम कर दिया, जिसके बाद पैरामिलिट्री फोर्स को हस्तक्षेप करना पड़ा। दक्षिण दिनाजपुर में भाजपा प्रत्याशी शुभेंदु शेखर के साथ मारपीट की गई, जिससे उन्हें मौके से भागकर अपनी जान बचानी पड़ी। वहीं आसनसोल में भाजपा उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल की गाड़ी पर हमला कर शीशे तोड़ दिए गए। इन घटनाओं ने चुनावी सुरक्षा और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नेताओं के तीखे बयान, सियासी माहौल गरम
चुनाव के बीच नेताओं की बयानबाजी भी लगातार तेज हो रही है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने दावा किया कि 4 मई को बंगाल में भाजपा की जीत का जश्न मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारी मतदान इस बात का संकेत है कि जनता बदलाव चाहती है और डर का माहौल खत्म हो रहा है। वहीं, भाजपा सांसद रवि किशन ने एक जनसभा में अपने अंदाज में लोगों को सकारात्मक रहने का संदेश दिया। दूसरी ओर विपक्षी दल इन बयानों को दबाव की राजनीति करार दे रहे हैं।
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हाई-वोल्टेज मुकाबला, नतीजों पर टिकी नजर
पश्चिम बंगाल का यह चुनाव अब पूरी तरह हाई-वोल्टेज मुकाबले में बदल चुका है। एक तरफ वॉर रूम में बैठकर रणनीतियां तैयार की जा रही हैं, तो दूसरी ओर जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच टकराव देखने को मिल रहा है। यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई बन गया है। पहले चरण की वोटिंग ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले चरणों में भी मुकाबला कड़ा रहने वाला है। चुनाव आयोग और सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना है। अभी सभी की नजरें अगले चरणों और अंतिम परिणामों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि पश्चिम बंगाल की सत्ता किसके हाथ में जाएगी और राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
