- लखीमपुर खीरी पहुंचकर उन्हें कई सौगातें दी मुख्यमंत्री ने
नया लुक संवाददाता
लखनऊ। आज का यह कार्यक्रम केवल अधिकार प्राप्त करने का आयोजन मात्र नहीं है। यह अधिकार से आत्मनिर्भरता व आत्मनिर्भरता से आत्मसम्मान की ऐतिहासिक यात्रा का वृतांत भी है। यदि आपको अधिकार मिल रहा है तो अधिकार के साथ-साथ आत्मसम्मान भी मिल रहा है और यह आत्मनिर्भरता की भी गारंटी है। हमारी परम्परा कहती है, हमारा शास्त्र कहता है-प्रजा सुखे सुखं राज्ञः, प्रजानामं च हिते हितं। यानी प्रजा के सुख में राजा का सुख निहित है। प्रजा के हित में ही उसे अपना हित देखना चाहिए। जो स्वयं को प्रिय लगे उसमें राजा का हित नहीं है, उसका हित तो प्रजा को जो प्रिय लगे उसमें है। उक्त बातें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज लखीमपुर खीरी के एक कार्यक्रम में कहीं। सीएम योगी आज थारू जनजातियों के एक कार्यक्रम में सम्मिलित होने लखीपुर खीरी पहुंचे थे। उन्होंने वहां विलुप्त हो रही थारू जनजाति के लोगों को कई सौगातें दीं।
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सीएम ने सम्बोधित करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल जमीन देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों को आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री के इस प्रस्तावित दौरे को लेकर प्रशासन पूरी तरह हाई अलर्ट पर है। अफसर दिन-रात एक कर रहे हैं ताकि कार्यक्रम में कोई कमी न रह जाए और जमीनी हकीकत पर कोई सवाल खड़ा न हो। जमीन का अधिकार मिलने के बाद ये परिवार अब न केवल अपनी जमीन पर कानूनी रूप से मालिक बनेंगे, बल्कि बैंक से लोन लेने, मकान बनाने और जमीन के अन्य उपयोग में भी सक्षम हो सकेंगे।
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अब तक कागजों में नाम न होने के कारण ये सभी सुविधाएं उनसे दूर थीं मुख्यमंत्री के आगमन से पहले ही गांवों में उत्साह चरम पर है। दशकों से लंबित मांग पूरी होने की उम्मीद में लोगों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही है। मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर प्रशासनिक अमला पूरी तरह सक्रिय है। कार्यक्रम स्थल से लेकर गांवों तक साफ-सफाई, सजावट और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि मुख्यमंत्री के सामने कोई खामी न आए। उधर, दशकों से जमीन पर हक के इंतजार में जी रहे मियांपुर के विस्थापित परिवारों के लिए अब बड़ी राहत की खबर है। 11 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संभावित दौरे में 156 परिवारों को उनकी कृषि भूमि का मालिकाना हक मिलने जा रहा है।
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पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से 1964 में विस्थापित होकर आए इन परिवारों को बसाने के बाद सरकार ने प्रति परिवार 4.75 एकड़ भूमि तो दी, लेकिन मालिकाना हक न होने के कारण न तो वे जमीन बेच सकते थे और न ही उस पर बैंक से ऋण ले पा रहे थे। मियांपुर गांव में जल जीवन मिशन के तहत बिछाई गई पाइपलाइन होने के बावजूद अधिकांश घरों में पानी नहीं पहुंच रहा है। कई जगह पाइप लाइनें लटकी हुई हैं और टोटियां सूखी पड़ी हैं। गांव की महिलाओं का कहना है कि पिछले छह महीने से शिकायत के बावजूद पानी की समस्या का समाधान नहीं हुआ। ऐसे में सीएम के दौरे से पहले ग्रामीणों ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि अधिकारी कार्यक्रम की तैयारियों और सजावट में जुटे हैं, लेकिन जमीनी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। ग्राम प्रधान मिथुन ढाली ने भरोसा दिलाया है कि गांव की सभी समस्याओं का शीघ्र समाधान कराया जाएगा।
कौन है थारु जनजाति
थारू भारत उत्तर प्रदेश उत्तराखंड, बिहार और नेपाल के तराई क्षेत्र में निवास करने वाली एक प्रमुख स्वदेशी जनजाति है, जो अपनी अनूठी संस्कृति, वन-निर्भरता और कृषि के लिए जानी जाती है। ये लोग थारू लोग खुद को राजस्थान के राजपूतों का वंशज मानते हैं, जबकि कुछ इन्हें मंगोल या बौद्ध परंपराओं से जोड़ते हैं। यह समुदाय मुख्य रूप से हिंदू धर्म का पालन करता है और प्रकृति के करीब रहता है।
कितनी हैं इनकी संख्या
एक मार्च 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या 1,21,01,93,422 (1.21 अरब) थी। इसमें 62.37 करोड़ पुरुष और 58.64 करोड़ महिलाएं शामिल थीं। यह 2001 की तुलना में 181 मिलियन से अधिक की वृद्धि थी।
