- स्पेशल फूड पर प्रति कुत्ता सलाना डेढ़ लाख का खर्चा
- विपक्ष का आरोप: यह ‘कुत्ता खाना घोटाला’ है,
रंजन कुमार सिंह
झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने झारखंड में CID के खोजी कुत्तों (Sniffer Dogs) की कार्यक्षमता और स्वास्थ्य को सुधारने के लिए उनके खान-पान में बड़ा बदलाव करते हुए अब इन कुत्तों के लिए विदेश से उच्च गुणवत्ता वाला विशेष खाना मंगवाने की सोचा है। इस फैसले का उद्देश्य विस्फोटक खोजने की उनकी दक्षता बढ़ाना है। CID खोजी कुत्तों को विदेशी खाना (imported food) खिलाया जाएगा। इसका मकसद कुत्तों की शारीरिक क्षमता और सूंघकर विस्फोटक पहचानने की दक्षता में सुधार करना है। यह फैसला कुत्तों के बेहतर स्वास्थ्य और उनकी ड्यूटी की प्रभावशीलता से जुड़ा है। झारखंड पुलिस के CID के स्निफर और ट्रैकर डॉग्स को प्रीमियम हाई-प्रोटीन विदेशी ब्रांड (जैसे रॉयल कैनिन और डिबैक सेंस) का खाना खिलाने की योजना है। एक खोजी कुत्ते पर प्रतिदिन लगभग 300 से 400 रुपये का खर्च आएगा। प्रति श्वान सालाना खर्च लगभग 1.44 लाख रुपये होगा।
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यह प्रीमियम खाना विशेष रूप से CID के 58 प्रशिक्षित स्निफर और ट्रैकर कुत्तों के लिए है, जिनमें मुख्य रूप से बेल्जियम शेफर्ड (मालिनोइस) और लैब्राडोर नस्लें शामिल हैं। इसके अलावा, झारखंड पुलिस 9 नए बेल्जियम शेफर्ड और 13 लेब्राडोर खरीदने की प्रक्रिया में भी है। वर्तमान में झारखंड पुलिस (CID) के पास 58 प्रशिक्षित खोजी श्वान मौजूद हैं। इन्हें 9 जिलों के अलावा रांची, हजारीबाग, पलामू, चाईबासा, जमशेदपुर, बोकारो, दुमका और देवघर एयरपोर्ट पर तैनात किया जाता है।
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झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार द्वारा विदेश से विशेष भोजन (Special Food) मंगवाने और कुत्तों के लिए बेहतर पोषण संबंधी योजना के बाद विपक्षी दल (मुख्यतः भाजपा) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्षी नेताओं ने इस योजना को निशाना बनाते हुए कहा है कि जहां राज्य की जनता भुखमरी और राशन की कमी से जूझ रही है, वहीं सरकार सरकारी खजाने से कुत्तों के लिए विदेश से महंगे भोजन की व्यवस्था कर रही है। सोशल मीडिया और राजनीतिक बयानों में भाजपा समर्थकों ने इस कदम को “कुत्ता खाना घोटाला” (Dog Food Scam) की तैयारी बताया है, आरोप लगाते हुए कहा है कि यह जनहित के बजाय सरासर फिजूलखर्ची है। विपक्ष ने सवाल उठाया है कि क्या राज्य के सरकारी स्कूलों, अस्पतालों और किसानों की अनदेखी करके कुत्तों को ‘VIP’ ट्रीटमेंट देना सरकार की प्राथमिकता है? भाजपा ने इसे सरकार की गलत प्राथमिकताओं के तौर पर पेश किया है, जबकि राज्य में कानून व्यवस्था और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे लंबित हैं। कुल मिलाकर विपक्षी दल इस मुद्दे को जनभावना के खिलाफ और सरकारी धन के दुरुपयोग के रूप में जनता के बीच ले जा रहे हैं।
