राजधानी लखनऊ के विकास नगर थाना क्षेत्र स्थित जानकीपुरम सेक्टर-सी में एक मकान विवाद ने तूल पकड़ लिया है। मामला कोर्ट और एलडीए (लखनऊ विकास प्राधिकरण) के बीच उलझा हुआ है, वहीं पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। पीड़िता किरण का आरोप है कि वह पिछले 9 महीनों से विकास नगर पुलिस से मुकदमा दर्ज कराने की मांग कर रही है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि एलडीए के मकान पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर रजिस्ट्री कराई गई और उसी आधार पर कोर्ट में केस जीत लिया गया।
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एलडीए का दावा है कि संबंधित मकान ऊमा सागर और नीता देवी के नाम दर्ज है। इसके बावजूद धीरेन्द्र पांडेय नामक व्यक्ति पर फर्जी रजिस्ट्री के जरिए कब्जा करने और कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप है। बताया जा रहा है कि कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मकान खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर दी। आरोप है कि इस दौरान असली मकान मालिक की मौजूदगी के बिना ही घर का सामान बाहर निकाल दिया गया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और पीड़िता किरण घर के बाहर खड़ी होकर पुलिस से कार्रवाई रोकने की गुहार लगाती रही। फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं, एलडीए और कोर्ट के दस्तावेजों के बीच उलझे इस विवाद का अंतिम सच सामने आना बाकी है।
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