- कारागार मंत्री ने दीक्षांत परेड में दी प्रशिक्षुओं को नई जिम्मेदारियों की सीख
- डॉ. सम्पूर्णानन्द कारागार प्रशिक्षण संस्थान में 119 प्रशिक्षुओं की पासिंग आउट परेड सम्पन्न
- सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षुओं को किया सम्मानित, अनुशासन और मानवता पर दिया विशेष जोर
लखनऊ । दीक्षांत परेड केवल प्रशिक्षण की समाप्ति नहीं, बल्कि नई जिम्मेदारियों और कर्तव्यों की शुरुआत है। यह बात रविवार को पुरानी जेल रोड स्थित संपूर्णानंद कारागार प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षु डिप्टी जेलर (121वाँ सत्र) एवं उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखण्ड के प्रशिक्षु जेल वार्डर (178वाँ सत्र) की दीक्षांत परेड में प्रदेश के कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने कही। उन्होंने कहा कि कारागार विभाग केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि सुधार और पुनर्वास की महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाता है। इसलिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने दायित्वों का निर्वहन संवेदनशीलता, अनुशासन और मानवीय दृष्टिकोण के साथ करना चाहिए। इस समारोह में कुल 119 प्रशिक्षुओं ने भाग लिया।
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जिसमें 4 अधिकारी संवर्ग (उत्तर प्रदेश) तथा 115 जेल वार्डर शामिल रहे। इनमें 74 उत्तर प्रदेश एवं 41 उत्तराखण्ड के प्रशिक्षु सम्मिलित थे। समारोह में अधिकारी संवर्ग में सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षार्थी का पुरस्कार शशिकांत (डिप्टी जेलर, उत्तर प्रदेश) को प्रदान किया गया, जबकि जेल वार्डर संवर्ग में सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षार्थी का पुरस्कार सुश्री कविता जलाल (टिहरी गढ़वाल, उत्तराखण्ड) को दिया गया।
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कार्यक्रम में महानिदेशक कारागार पीसी मीना ने बताया कि संस्थान की स्थापना 1 अगस्त 1940 में हुई थी और यह एशिया का पहला जेल प्रशिक्षण संस्थान है। अब तक यहां 1736 अधिकारियों एवं 13,391 जेल वार्डरों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि 1287 अधिकारियों एवं कार्मिकों को रिफ्रेशर कोर्स के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया है। इस अवसर पर पुलिस उपमहानिरीक्षक कारागार सुभाष चंद्र शाक्य व प्रदीप गुप्ता, उपमहानिरीक्षक कारागार शैलेन्द्र कुमार मैत्रेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक रंग बहादुर पटेल एवं शशिकांत सिंह उपस्थित रहे।
