नेपाल के नई सरकार की प्राथमिकता भारत से रिश्ते मजबूत करने की होगी

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यशोदा श्रीवास्तव

नेपाल में बालेन शाह के नेतृत्व में सत्तारूढ़ होने वाली नई सरकार के कामकाज के तौर तरीकों की प्रतीक्षा में दुनिया के कई देश हैं लेकिन नेपाल के पड़ोसी देशों को खास तौर पर इसकी प्रतीक्षा बेसब्री से है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष मतदान के चुनाव की गिनती पूरी हो चुकी है, दोनों चुनाव प्रणाली में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को 175 से अधिक सीटें हासिल हुई है। प्रत्यक्ष प्रणाली के चुनाव में 165 सीटों में से राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को सर्वाधिक 125 सीटें हासिल हुई है जो अबतक किसी भी पार्टी को मिली सीटों से कहीं ज्यादा है। अप्रत्यक्ष चुनाव प्रक्रिया में अभी कुछ आधिकारिक औपचारिकता बाकी है जिस वजह नेपाल में नई सरकार के सत्ता रूढ़ होने में एक सप्ताह का समय लग सकता है। इस बीच यह साफ है कि नई सरकार का गठन बालेन शाह के नेतृत्व में ही होगा।

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राजशाही के परंपरागत राजाओं के राजतिलक को छोड़ दें तो दुनिया में इक्का दुक्का उदाहरण ही मिलेंगे जब किसी देश ने 35 वर्षीय एक नौजवान पर भरोसा जताते हुए सत्ता की चाभी सौंप दी हो। काठमांडू के नारा देवी में पैदा हुए बालेन शाह का पैतृक गांव मधेश के महोत्तरी जिले में है। उनके पिता एक आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं। बालेन शाह के रैप सांग में मुख्यतः नेपाल की पीड़ा और दुश्वारियों का दर्दनाक वर्णन होता था और यही कारण है कि वे नेपाल के युवाओं में रोल-मॉडल बन गए। काठमांडू के युवाओं ने इन्हें 2023 में पहले काठमांडू का मेयर बनाया और अब नेपाल भर के इन्हीं युवाओं ने नेपाल की सत्ता सौंप दी। बालेन शाह के नेतृत्व में सत्ता रूढ़ होने वाली इस सरकार में अपेक्षाकृत युवाओं की भरमार होगी। राजनीतिक विश्लेषकों के आकलन में इस युवा सरकार को लेकर आशा और उम्मीद तो है लेकिन कुछ भ्रांतियां और संशय भी है जिस पर से पर्दा हटना बाकी है। वाकई यह हैरत की बात है कि जिस आंदोलन में राजधानी काठमांडू तबाह हुआ हो,उसका इल्जाम युवाओं पर लगा हो और उन्हीं युवाओं में से कुछ राजनीति में आकर चुनाव लड़ रहे हों और जनता इन पर विश्वास जताते हुए सत्ता सौंपने का निर्णय ले रही हो, तो यह महज एक्सीडेंटल नहीं है। सोचिए नेपाल की जनता अपनी ही चुनी हुई सरकारों द्वारा कितना धोखा खाई होगी और कितनी बार ठगी गई होगी तब ऐसा निर्णय लेने को मजबूर होना पड़ा होगा। बालेन शाह के नेतृत्व में बनने वाली नेपाल की अपेक्षाकृत युवा सरकार नेपाल के लोगों की अपेक्षानुरूप काम कर पाएगी,इसका रुझान सत्ता रूढ़ होने के कुछ दिन बाद ही पता चल पाएगा।

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बालेन शाह का प्रधानमंत्री चुना जाना मधेश क्षेत्र के लोगों के लिए गर्व की बात है क्योंकि पहली बार ऐसा है कि नेपाल की सर्वोच्च सत्ता पर मधेश का कोई शख्स आसीन होने जा रहा है। इस क्षेत्र में पूर्व में नेपाली कांग्रेस का वर्चस्व रहा करता था। मधेश क्षेत्र के सांसद के बदौलत कोइराला परिवार के सदस्य स्व. वीपी कोइराला से लेकर गिरिजा प्रसाद कोइराला और सुशील कोइराला तक प्रधानमंत्री होते रहे हैं लेकिन इस परिवार ने प्रधानमंत्री तो दूर मधेश से नेपाली कांग्रेस का सभापति तक के बारे में नहीं सोचा। इस बार काफी संभावना है कि प्रधानमंत्री के साथ नेपाली कांग्रेस के संसदीय दल का नेता भी मधेश से हो। हालांकि अंकगणित के हिसाब से नेपाली कांग्रेस दूसरे नंबर की पार्टी तो है लेकिन प्रमुख विपक्षी के लायक नहीं है।

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राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के दो तिहाई से अधिक सदस्य युवा हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जो नई सरकार में गृह मंत्री हो सकते हैं, वे भी युवा हैं और संभावित प्रधानमंत्री बालेन शाह तो महज 35 वर्ष के ही हैं। सुडान गुरूंग जिनकी पहचान जेन जी आंदोलन के नायक के रूप में हैं, वे भी बमुश्किल 30 के ही होंगे। नेपाल में बदलाव का साक्षी बने नेपाल के युवा पावर की चर्चा अब पूरी दुनिया में है। निसंदेह नेपाल की यह युवा सरकार नेपाल में बदलाव के अनुभूति की इबारत लिखने का प्रयास करेगी जो नेपाल के लिए सुखद होगा ही दुनिया के लिए भी एक नजीर होगा, जैसा कि इनमें नेपाल के लिए कुछ कर गुजरने का जुनून दिख रहा है।

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नेपाल एक ऐसा प्लेटफार्म है जिसपर चीन की नजर है ही, अमेरिका भी यहां अपना पांव पसार रहा है। भारत चूंकि इस नन्हें राष्ट्र का पड़ोसी है और दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी संधियों के नाते भारत और नेपाल के बीच के संबंध सबसे अलग और आत्मीय है। नेपाल के नई सरकार से भी भारत के रिश्तों को लेकर कोई कन्फ्यूजन नहीं है।भारत के पीएम मोदी की बालेन शाह और पार्टी अध्यक्ष रवि लामी छाने से वार्ता के बाद नेपाल और भारत से रिश्तों में प्रगाढ़ता के संकेत मिले हैं। भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने बालेन शाह और रवि लामी छाने को प्रचंड जीत की बधाई दी और नेपाल के नई सरकार के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई। मोदी से वार्ता के बाद बालेन शाह और रवि लामी छाने का जो बयान आया दर असल भारत के लिए संतोष जनक और उत्साहवर्धक है। संभावित सरकार के दो बड़े हस्तियों ने इस वार्ता को बहुत ही सार्थक बताया और कहा भारत सदैव ही नेपाल का हितैषी राष्ट्र रहा है, आगे भी रहेगा। भारत और नेपाल के बीच चलताऊ रिश्ते तो है नहीं, दोनों देश रोटी बोटी के रिश्ते से लेकर रीति रिवाज, धर्म, सांस्कृतिक और सभ्यता की दृष्टि से बेहद करीब हैं। बालेन शाह और रवि लामी छाने दोनों ने इस संबंधों को और आगे बढ़ाने को लेकर उत्सुकता दिखाई है। हालांकि इसका संकेत तभी मिल गया था जब बीच चुनाव में पार्टी अध्यक्ष रवि लामी छाने ने काठमांडू के एक होटल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव से मुलाकात की थी।

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नेपाल चुनाव में ये जो परिवर्तन की आंधी चली है,दर असल यह राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी पर भरोसा और जिम्मेदारियों का बोझ है। पहले की सरकारों में पहाड़ और मैदान, पहाड़ी और मधेशी को लेकर भी विभेद रहा है,अब शायद ऐसा न हो। संविधान में कुछ मुद्दों को लेकर मधेश की अनदेखी हुई है। मधेशी नेता इसी मुद्दे को लेकर मधेशी जनता को ठगते रहे हैं। बालेन शाह ने संविधान संशोधन की बात खुद ही कहकर मधेशी नेताओं के मुंह पर ताला लगा दिया। खैर इस चुनाव में तो मधेश आधारित राजनीतिक दलों के अस्तित्व पर ही संकट आ पड़ा है। भारत और नेपाल के बीच जो उत्तराखंड के भू क्षेत्र का विवाद है, नई सरकार उसे हल करना चाहेगी लेकिन पूर्व पीएम ओली की तरह बवाल काट कर नहीं। इस मुद्दे को बात चीत के जरिए सुलझाने पर जोर होगा। इसके अलावा भारत और नेपाल के बीच जहां जहां भी सीमा विवाद है ,इसे हल करने का प्रयास होगा। दोनों देशों के बीच करीब 1760 किमी लंबी सीमा है जहां सौ से अधिक सीमा विवाद है। उम्मीद है नेपाल की नई सरकार कुछ अलग करने की शुरुआत भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद को सुलझाने से करेगी।

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