पुश्तैनी जमीन गई, बिक गया तीन मंजिला मकान और अब बेटा भी नहीं रहेगा

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  • बीटेक छात्र हरीश राणा को दी जा रही इच्छा मृत्यु
  • “सबको माफ़ करते हुए और सबसे माफ़ी माँगते हुए.. जाओ”

नया लुक ब्यूरो

नई दिल्ली/गाजियाबाद। हरीश राणा के पिता और मां के लिए भी यह बेहद कठिन क्षण हैं। इतने सालों के संघर्ष और बेटे के इलाज के लिए सबकुछ गंवा चुके मां-बाप ने सीने पर पत्थर रखकर बेटे के लिए इच्छा मृत्यु की मांग की थी। 13 साल तक मरणासन्न रहे हरीश राणा के अब आखिरी कुछ समय बचे हुए हैं। मां-बाप की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से ‘इच्छामृत्यु’की इजाजत मिलने के बाद हरीश को एम्स के उस वार्ड में भर्ती करा दिया गया है, जहां उन्हें अपने शरीर त्याग के लिए मदद की जाएगी। इस बीच हरीश राणा के पिता और मां के लिए भी यह बेहद कठिन क्षण हैं। इतने सालों के संघर्ष और बेटे के इलाज के लिए सबकुछ गंवा चुके मां-बाप ने सीने पर पत्थर रखकर बेटे के लिए इच्छा मृत्यु की मांग की थी। 13 साल से मरणासन्न अवस्था बेटे की देखभाल कर रहे परिवार का संघर्ष बहुत बड़ा रहा। बेटे के इलाज में बहुत खर्च करने के बाद भी जब उम्मीद नजर नहीं आई तब जाकर मां-बाप ने इच्छा मृत्यु के लिए अर्जी दायर की थी। हरीश के इलाज पर हर महीने करीब 70 हजार तक का खर्च आता था। इलाज में पुरखों का घर और जमीन बिक गई। दिल्ली स्थित तीन मंजिला मकान तक बिक गया था।

हरीश राणा के आखिरी कुछ दिन, इच्छामृत्यु से पहले भीगी आंखों से निहार रहे मां-बाप

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अशोक राणा ने कहा था कि अपनी औलाद को ऐसे पल-पल तड़पते देखना बहुत मुश्किल होता है। हम बयां नहीं कर सकते कि हम पर क्या गुजर रही है। उनका कहना था कि बेटे के लिए मौत मांगना इतना आसान नहीं रहा। मां निर्मला देवी का कहना था कि पिछले 13 सालों से उनकी पूरी दिनचर्या बेटे के इर्द-गिर्द ही घूमती रही।

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क्या हुआ था हरीश के साथ

हरीश राणा चंडीगढ़ के एक कॉलेज से बीटेक की पढ़ाई कर रहे थे। 20 अगस्त 2013 को पीजी की चौथी मंजिल से गिरने के बाद कोमा में चले गए। चंडीगढ़ से दिल्ली एम्स तक हरीश राणा का इलाज चला, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। लंबे समय से अब मां-बाप घर पर उनकी देखभाल कर रहे थे।

इच्छामृत्यु की इजाजत के बाद हरीश दिल्ली लाए गए,

13 वर्षों से कोमा में रह रहे 32 वर्षीय हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट द्वारा निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दिए जाने के तीन दिन बाद शनिवार सुबह गाजियाबाद से एंबुलेंस से दिल्ली लाया गया। यहां एम्स के कैंसर सेंटर आईआरसीएच (इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल) के पैलिएटिव केयर वार्ड में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि एम्स प्रशासन ने आंकोएनेस्थीसिया एवं पैलिएटिव केयर के विशेषज्ञ डॉक्टर के नेतृत्व में आठ से नौ डॉक्टरों की एक कमेटी गठित की है। इसमें अलग-अलग कई विभागों के डॉक्टर शामिल किए गए हैं। इस कमेटी की देखरेख में उनके स्वास्थ्य की देखभाल और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल सुनिश्चित होगी। एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि पैलिएटिव केयर वार्ड में छह बेड की सुविधा है।

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वेंटिलेटर सपोर्ट नहीं दिया जाएगा

एम्स में डॉक्टर व नर्सिंग कर्मचारी हरीश राणा की देखभाल कर रहे हैं। डॉक्टर बताते हैं कि अस्पताल में उनका पैलिएटिव केयर होगा। जीवन बचाने के मकसद से कोई सक्रिय इलाज या वेंटिलेटर सपोर्ट नहीं दिया जाएगा। पैलिएटिव केयर का मकसद मरीज को दर्द या किसी तरह का पीड़ा होने पर उससे राहत देना होता है। ऐसे में वह कई दिनों तक एम्स में भर्ती रह सकते हैं, ताकि प्राकृतिक तरीके से वह जीवन त्याग सके।

सोसायटी के लोगों को भनक नहीं

राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज एम्पायर सोसाइटी में रहने वाले हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की मंजूरी मिलने के बाद उनके परिजन आगे की प्रक्रिया के लिए उन्हें एम्स लेकर गए। हरीश को ले जाने की पूरी प्रक्रिया बेहद शांत और गोपनीय तरीके से पूरी की गई, जिसके चलते सोसाइटी के अधिकांश निवासियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। वहीं, सोसाइटी परिसर में अन्य दिनों की अपेक्षा शनिवार को चहल-पहल भी कम रही। लोगों ने बताया कि शाम को पता चला कि हरीश को लेकर परिजन एम्स पहुंच चुके हैं।

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