गैस सिलेंडर के मामले में सरकार के दावे हवा हवाई

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  • घरेलू और कमर्शियल सिलेंडरों की जमकर हो रही कालाबाजारी

लखनऊ। देश और प्रदेश सरकार के दावे भले ही कुछ हो लेकिन हकीकत ठीक इनके विपरीत है। रसोई गैस की किल्लत की वजह से कई घरों का चूल्हा बंदी के कगार पर पहुंच गया है। हकीकत यह है कि अभाव के चलते गैस सिलेंडरों की खुलेआम कालाबाजारी हो रही है। 950 में मिलने वाला गैस सिलेंडर 1200 से 1500 रुपए प्रति सिलेंडर मिल रहा है। इससे बदतर स्थित कमर्शियल सिलेंडर की हो गई है। यह सिलेंडर 2200 रुपए में मुश्किल से मिल पा रहा है।

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बीते दिनों युद्ध के कारण सरकार ने गैस सिलेंडर के दामों में एकाएक बढ़ोत्तरी कर दी। घरेलू सिलेंडर के दाम में 60 रुपए और कमर्शियल सिलेंडर के दाम में 115 रुपए प्रति सिलेंडर बढ़ा दिया है। दामों में बढ़ोत्तरी के बाद अब आम जनता के सामने रसोई गैस की किल्लत हो गई है। आम जनमानस को घरेलू सिलेंडर प्राप्त करने के लंबी लाइन लगाने के बाद भी सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। तेलीबाग गैस एजेंसी और ममता गैस सर्विस में तो पिछले तीन दिनों से सिलेंडर की बुकिंग तक नहीं हो पा रही है। एजेंसी की इस तानाशाही की वजह से उपभोक्ताओं को 950 रुपए में मिलने वाला गैस सिलेंडर 1200 से 1500 रुपए ब्लैक में खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

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इसी प्रकार कमर्शियल सिलेंडर भी दुकानदारों को आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। बंगला बाजार स्थित संकटा स्वीट के प्रोपराइटर मदन ने बताया कि जो सिलेंडर पूर्व में 1500 रुपए में आसानी से मिल जाता था उसके लिए अब उन्हें 2200 से 2300 रुपए देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि जब सिलेंडर महंगा मिलेगा तो खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ना स्वाभाविक है। इसी प्रकार ठेले पर घरेलू सिलेंडरों का उपयोग करके जीविका चलाने वाले पटरी दुकानदारों के सामने रोजी रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है। गैस सिलेंडर की किल्लत होने की वजह से सैकड़ों की संख्या में लोगों के घरों का चूल्हा जल पाना मुश्किल हो गया है।

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