- रोटी, जिम्मेदारी और जोखिम, खाड़ी की धूप में जलते भारतीय सपने
- 40 लाख लखनवी चिंतित, सवा लाख से ज्यादा खाड़ी देशों में फंसे हैं परिजन
- देश के कई लाख युवा खाड़ी देश समेत मिडिल ईस्ट में करते हैं मेहनत-मजदूरी
नया लुक डेस्क (श्वेता शर्मा, अंकिता यादव, आशीष द्विवेदी और प्रशांत पाल सूर्यवंशी)
लखनऊ/दुबई/तेहरान/शारजाह। देश के हजारों नहीं, लाखों युवा अपने सपनों को पूरा करने के लिए सरहद पार करते हैं। कोई बेहतर भविष्य की तलाश में, कोई मजबूरी में। वे ईरान, ओमान, बहरीन, सऊदी अरब, यूएई जैसे देशों में जाकर मेहनत-मजदूरी करते हैं। कोई निर्माण स्थलों पर पसीना बहाता है, कोई फैक्ट्रियों में काम करता है, तो कोई रेगिस्तान में गाय, ऊंट और बकरियां चराता है। उनकी दिनचर्या कठिन होती है, लेकिन दिल में एक ही ख्वाहिश बसती है, अपने घर वालों के चेहरे पर मुस्कान लाना। हर महीने की कमाई में से बड़ा हिस्सा वे भारत भेजते हैं। कोई अपने गांव में पक्का मकान बनवाने के लिए पैसे जोड़ रहा है, कोई अपनी बहन की शादी के लिए, तो कोई सपना देखता है कि कुछ साल बाद लौटकर अपना छोटा-सा व्यापार शुरू करेगा और परिवार के साथ सम्मान की जिंदगी जिएगा।
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लेकिन अब मिडिल ईस्ट जैसे क्षेत्रों में युद्ध या तनाव की स्थिति से सबसे ज्यादा असर इन्हीं मेहनतकश हाथों पर पड़ा है। अचानक एयरस्पेस बंद हो जाता है, फ्लाइटें रद्द हो जाती हैं, सायरन बजते हैं और लोगों को बंकरों में शरण लेनी पड़ती है। विदेश में फंसे इन युवाओं के लिए हर दिन अनिश्चितता से भरा है। वहीं भारत में उनके परिजन टीवी स्क्रीन और मोबाइल फोन से चिपके रहते हैं। हर खबर पर दिल धड़क उठता है। मां की आंखें नम हैं, पिता की चिंता चेहरे पर साफ झलकती है, और छोटे भाई-बहन दुआ करते हैं कि ‘भैया सकुशल लौट आएं।’
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ये युवा किसी राजनीति का हिस्सा नहीं हैं। वे केवल अपने सपनों और जिम्मेदारियों के लिए घर से दूर गए हैं। लेकिन जंग और तनाव की आंच में सबसे पहले उनके सपने झुलसते हैं। इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पर भी पड़ा है। शहर के 40 लाख से ज्यादा लोग चिंता में हैं क्योंकि लखनऊ के सवा लाख से अधिक लोग ईरान, ओमान, बहरीन, मस्कट, रियाद, दुबई, रसअलखेमा और शारजाह जैसे खाड़ी देशों में कामकाज या कारोबार के सिलसिले में मौजूद हैं। ईरान का एयरस्पेस बंद होने और क्षेत्रीय हवाई मार्ग प्रभावित होने के कारण कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। ऐसे में खाड़ी देशों में फंसे लोग लगातार लखनऊ की ट्रैवल एजेंसियों को फोन कर वतन वापसी के लिए मदद की गुहार लगा रहे हैं। एजेंसियों का कहना है कि एयरस्पेस खुलने तक विकल्प सीमित हैं, हालांकि वैकल्पिक रूट और चार्टर फ्लाइट्स की संभावनाओं पर नजर रखी जा रही है।
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छोटे इमामबाड़े पर गरमाया माहौल
लखनऊ के ऐतिहासिक छोटा इमामबाड़ा के पास विरोध-प्रदर्शन की तैयारियां तेज हो गई हैं। हालांकि प्रशासन ने एहतियात के तौर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने की तैयारी की है। अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, इसके लिए आयोजकों से लगातार संवाद किया जा रहा है। अमेरिका और इज़रायल के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन की घोषणा की गई है। शिया समुदाय के कई धर्मगुरु और नेता इसमें लेंगे हिस्सा। कहा जा रहा है कि ईरान में मारा गया उनका सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामनेई शिया समुदाय से ताल्लुक रखता था। इस प्रदर्शन में मौलाना याकूब अब्बास समेत कई धर्मगुरुओं के मौजूद रहने की बात बताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि ये पुतला दहन करेंगे और और शांतिपूर्ण मार्च निकालेंगे।
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मिर्जापुर के 22 मजदूर इजराइल के तेल अवीव में फंसे
उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जिले के 22 मजदूर इज़राइल की राजधानी तेल अवीव में फंसे हुए हैं। युद्ध की स्थिति को देखते हुए उन्हें बंकरों में जाने के निर्देश दिए गए हैं। परिजनों के मुताबिक मजदूर फिलहाल सुरक्षित हैं और उन्होंने अपनी स्थिति की तस्वीर भी भेजी है। परिवारों की चिंता लगातार बढ़ रही है और वे सरकार से जल्द सुरक्षित वापसी की व्यवस्था करने की मांग कर रहे हैं।
