भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सबसे भरोसेमंद प्रक्षेपण यान पीएसएलवी की हालिया विफलताओं ने वैज्ञानिकों और सरकार की चिंता बढ़ा दी है। पहली बार इसरो ने अपने आंतरिक विश्लेषण के साथ-साथ सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिकों की एक स्वतंत्र समिति का गठन किया है, जो इन असफलताओं के कारणों की गहराई से जांच करेगी। इस समिति में इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ और प्रधानमंत्री के पूर्व वैज्ञानिक सलाहकार के. विजय राघवन को शामिल किया गया है।
पिछले वर्ष मई 2025 में पीएसएलवी-सी61 मिशन के दौरान ईओएस-09 उपग्रह को कक्षा में स्थापित करने का प्रयास किया गया था, लेकिन प्रक्षेपण के कुछ ही मिनट बाद रॉकेट अपने निर्धारित मार्ग से भटक गया। इसके बाद जनवरी 2026 में पीएसएलवी-सी62 मिशन भी असफल रहा, जिसमें डीआरडीओ और अन्य संस्थानों के कई उपग्रहों को कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका। पीएसएलवी के तीन दशक लंबे इतिहास में लगातार दो मिशनों का विफल होना अभूतपूर्व माना जा रहा है।
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विशेषज्ञ समिति तकनीकी कारणों के साथ-साथ संगठनात्मक प्रक्रियाओं, निर्माण प्रणाली और गुणवत्ता नियंत्रण की भी समीक्षा करेगी। समिति यह भी देखेगी कि क्या निर्माण, असेंबली या परीक्षण प्रक्रिया में किसी तरह की कमी रही है। यह जांच रिपोर्ट अप्रैल तक इसरो अध्यक्ष को सौंपी जाएगी।
इसरो के लिए पीएसएलवी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे कई सफल मिशनों के कारण ‘वर्क हॉर्स’ कहा जाता है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि जांच के निष्कर्ष भविष्य के मिशनों को और अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने में मदद करेंगे। हालांकि, अगली लॉन्चिंग में कुछ देरी की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि जांच पूरी होने के बाद ही नई तारीख तय की जाएगी।
