दो टूक : …बाहरियों से नहीं अपनों से कैसे निपटेंगे योगी आदित्यनाथ

Untitled 3 copy 30

राजेश श्रीवास्तव

कल सचिवालय में एक अधिकारी ने बातचीत के दौरान कहा ‘भारतीय जनता पार्टी को कोई हरा नहीं सकता, उसे अगर कोई हरा सकता है तो वह खुद भारतीय जनता पार्टी ही है। यूपी में उसे न पीडीए की धारा चलाकर सपा हरा सकती है न मुस्लिम तुष्टीकरण करके कांग्रेस।’ उनकी इस बात के बाद यूपी की सियासत के नौ साल के पन्ने जैसे ताजे हो गये। पिछले नौ सालों से यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरोधी उनकी ताजपोशी के बाद ही सक्रिय हो गये थे। लेकिन अब जब चुनाव के मात्र कुछ महीने या फिर यूं कहें कि एक साल ही शोष है तो हर मुद्दा ऐसा खड़ा हो रहा है जो आने वाले चुनाव में योगी को हर दिन पीछे करता हुआ दिख रहा है। योगी आदित्यनाथ को बाहर से हराने का माद्दा न तो समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव में हैं न ही खुद अपनी जमीन तलाश रही कांग्रेस में है। बसपा तो मानो अपने अस्तित्व को ही संजोने में जुटी है। उनको अगर कोई हरा सकता है तो खुद भाजपा ही है और उन्हें इन दिनों अंदर से ही चुनौती मिल रही है। इन चुनौती देने वालों में केंद्रीय नेतृत्व से अमित शाह और उत्तर प्रदेश के दोनो उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य और बृजेश पाठक हैं।

नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें  

ये भी पढ़ें

सोनी ने हॉर्स पावर 350 के लिए 100cc को त्याग दिया, सौ सीसी ने सहर्ष करा दी शादी

बीते लगभग दो दशकों से यह चर्चा भी सिर उठा रही है कि प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी के बाद दावेदार कौन तो बरबस ही योगी आदित्यनाथ का नाम आता है, जबकि इसके वास्तविक उत्तराधिकारी अमित शाह हैं । इसीलिए सियासी गलियारें में अक्सर यह कहा जाता है कि अमित शाह की राह में अगर कोई सबसे बड़ा रोड़ा है तो वह शाह ही हैं। अमित शाह ने योगी की राह में रोड़े तब से बिछाने शुरू किये जब से बीते लोकसभा चुनाव हो रहे थे। याद कीजिये टिकटों के बंटवारे में योगी की नहीं चली। केंद्रीय नेतृत्व की खींचतान के चलते ऐसे-ऐसे लोगों को टिकट दे दिया गया जिनके न जीतने की गारंटी थी। परिणाम सामने आया भाजपा यूपी से लोकसभा चुनाव हार गयी। उसके बाद से अब जैसे-जैसे चुनाव करीब आता जा रहा है। वैसे-वैसे यूपी में हर तरफ से रार दिखती जा रही है। पहले ब्राह्मण राजनीति ने सिर उठाया। फिर यूजीसी ने आग उगला। अभी यूजीसी का असर कम होता देख फिर से ब्राह्मणों के सिर पर ठीकरा फोड़ कर सवर्ण वोट को बांटने का काम किया जा रहा है।

उपमुख्यंत्री बृजेश पाठक यूं ही नहीं बयान दे रहे हैं। यूं ही नहीं उन्होंने शंकराचार्य के विवाद को तूल दिया। अपने घर पर जब वह बटुकों का सम्मान कर रहे थे। तो उन्होंने  नारे लगवाये बृजेश पाठक सीएम बनें। यह संदेश था कि ब्राह्मण मुख्यमत्री योगी आदित्यनाथ से नाराज हैं। दूसरे उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की सीएम योगी से अदावत जगजाहिर है। गाहे-बगाहे अक्सर दिखती रहती है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि केंद्र की शह पर ही दोनों डिप्टी सीएम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राह में कांटे बोने का काम कर रहे हैं। अगर 2027 के चुनाव में यूपी से भाजपा कमजोर होती है। तो इसका ठीकरा योगी आदित्यनाथ पर फोड़ा जा सके और यह संदेश जाये कि योगी आदित्यनाथ अब वोट दिलाने में सक्षम नहीं रहे। पहले लोकसभा चुनाव हरवाया और अब विधानसभा चुनाव। क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता है तो योगी आदित्यनाथ तीसरी बार मुख्यमंत्री बनकर प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार होंगे और ऐसा भाजपा के चाणक्य को कतई मंजूर नहीं होगा।

नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें  

ये भी पढ़ें

UP के CM योगी को है महिला नेतृत्व पर भरोसा

दिल्ली में बैठकर जिस भाजपा के चाणक्य ने पूरी दुनिया में गोट बिठायी, आज तक विदेश नहीं गये। वह यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अब उनके ही प्यादों से निपटाने की साजिश में तो नहीं जुटे हैं, अगर ऐसा होता है तो उनकी राह साफ हो जायेगी। क्योंकि सीधो तौर पर तो योगी आदित्यनाथ से निपटना आसान नहीं होगा अब तक कई ऐसे मौके आये, चाहे यूपी के अब तक के कई डीजीपी पद पर नियुक्ति का मामला हो या फिर किसी का सेवा विस्तार। योगी की पंसद वाले मुख्य सचिवों को भी न तो केंद्र ने हरी झंडी दी और न ही डीजीपी को। इसीलिए अब केंद्रीय नेतृत्व को वरीयता की फाइल न भोजकर यूपी में योगी आदित्यनाथ ने हर बार कार्यवाहक डीजीपी से ही काम चलाया। यह भी रिकार्ड ही है कि आज तक योगी आदित्यनाथ के शपथ के बाद कोई अधिकृत डीजीपी नहीं बना। यानि कि यूपी की हर फाइल जो अमित शाह के विभाग पर गयी, उस पर पलीता जरूर लगा। लेकिन वह मुख्यमंत्री के मंसूबों पर पानी नहीं फेर पाये। यानि कि जब-जब दोनों के बीच मुकाबला हुआ तो मुख्यमंत्री बीस ही पड़े। इसीलिए अब यूपी के गढ़ में ही मुख्यमंत्री को घोरने  की रणनीति बनी है। उनके ही गृह जनपद से ही भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया, यह भी बड़ा सवाल रहा। लेकिन अब देखना है कि इस सियासी डगर में कौन आगे रहता है और कौन पीछे।

नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें  

Spread the love

महाराजगंज समारोह
Uttar Pradesh

नगर पालिका नौतनवां के समुचित विकास के लिए विधायक ऋषि त्रिपाठी सक्रिय

मोदी सरकार के 12 वर्ष और चेयरमैन बृजेश मणि त्रिपाठी के तीन वर्ष के कार्यकाल पर हुआ समारोह उमेश चन्द्र त्रिपाठी Maharajganj :प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने तथा नगर पालिका परिषद नौतनवां के अध्यक्ष बृजेश मणि त्रिपाठी के तीन वर्ष के सफल कार्यकाल के अवसर पर बुधवार […]

Spread the love
Read More
BRICS Leaders in Delhi
Uttar Pradesh

BRICS के बहाने दिल्ली में महाशक्तियों का जमावड़ा, क्या पश्चिमी देशों के लिए बजने वाली है खतरे की घंटी?

BRICS Leaders in Delhi :  नई दिल्ली में 22 और 23 जून को होने वाली BRICS राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) बैठक इस वर्ष के सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक आयोजनों में से एक बनने जा रही है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में चीन, रूस, ईरान समेत BRICS सदस्य देशों के शीर्ष सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिनिधि […]

Spread the love
Read More
अयोध्या राम मंदिर चोरी
Uttar Pradesh

अयोध्या राम मंदिर में दान पात्र से चोरी, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

रामलला के पैसे की चोरीः आस्था पर घात, डगमगाया विश्वास अजय कुमार, वरिष्ठ पत्रकार अयोध्या में प्रभु श्री रामलला के भव्य मंदिर से दान पात्र में चोरी की घटना ने एक साथ कई मोर्चों पर हलचल मचा दी है। करोड़ों रामभक्तों की आस्था को इस घटना ने गहरी ठेस पहुँचाई है तो उनका यह विश्वास […]

Spread the love
Read More