लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार में मत्स्य विभाग के मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने गुरुवार सुबह 10 बजे उत्तर प्रदेश मत्स्य विकास निगम लिमिटेड, उत्तर प्रदेश मत्स्य जीवी सहकारी संघ लिमिटेड, एकलव्य प्रशिक्षण केंद्र तथा विभागीय परिसंपत्ति चक मल्हौरी का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण से विभागीय अमले में हड़कंप मच गया। मंत्री सबसे पहले उत्तर प्रदेश मत्स्य विकास निगम लिमिटेड पहुंचे, जहां आधे से अधिक कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। उस समय महानिदेशक मत्स्य के. धनलक्ष्मी तथा निदेशक मत्स्य/प्रबंध निदेशक एन.एस. रहमानी मौजूद थे। मुख्य महाप्रबंधक (सीजेएम) मंत्री के पहुंचने तक कार्यालय में उपस्थित नहीं थे। बाद में उन्होंने जानकारी दी कि वह पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत लखनऊ स्थित गोमती हैचरी के निरीक्षण पर गए थे। निरीक्षण के दौरान मंत्री ने निगम एवं फेडरेशन के अधीन जलाशयों की नीलामी प्रक्रिया, वर्तमान संचालन स्थिति, आय-व्यय विवरण, अभिलेख, मालखाना और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की समीक्षा की। दस्तावेजी जांच के दौरान गंभीर वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं।

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शारदा सागर जलाशय में 1.60 करोड़ की अनियमितता
जांच में शारदा सागर जलाशय, पीलीभीत से जुड़ा मामला संज्ञान में आया, जिसमें विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों एवं ठेकेदारों द्वारा लगभग 1 करोड़ 60 लाख रुपये की अनियमितता कर राजस्व क्षति पहुंचाने का आरोप है। मंत्री ने तत्काल उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने के निर्देश देते हुए स्पष्ट कहा कि जांच में दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर विभागीय एवं विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

चक मल्हौरी भूमि पर अवैध कब्जा
निरीक्षण के क्रम में मत्स्य विभाग की परिसंपत्ति गाटा संख्या–16, ऊसर ग्राम चक मल्हौरी, तहसील सदर (क्षेत्रफल 0.734 हेक्टेयर) का भी जायजा लिया गया। मौके पर लगभग 3000 वर्ग फीट भूमि पर एक स्थानीय व्यक्ति द्वारा अवैध कब्जा पाया गया। संबंधित भूमि का सर्किल रेट 10 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट से अधिक बताया गया है, जिससे संभावित राजस्व क्षति का अनुमान लगाया जा रहा है। मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध कब्जे को तत्काल प्रभाव से हटाने, भूमि का सीमांकन कराने तथा राजस्व हानि का आकलन कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि विभागीय परिसंपत्तियों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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सख्त रुख और जवाबदेही की चेतावनी
डॉ. निषाद ने स्पष्ट किया कि मत्स्य विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अनुपस्थित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण लेने तथा कार्यप्रणाली में सुधार के निर्देश भी दिए। उन्होंने दोहराया कि सरकारी राजस्व की क्षति या विभागीय संपत्तियों पर अवैध कब्जे के मामलों में शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जाएगी और दोषियों को किसी भी स्तर पर संरक्षण नहीं दिया जाएगा।

