उत्तर प्रदेश में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। Akhilesh Yadav ने आरोप लगाया है कि वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जा रही है और PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज के मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि फर्जी Form-7 और ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ क्लॉज का इस्तेमाल कर सुनियोजित तरीके से वोट काटे जा रहे हैं। उनका आरोप है कि पिछड़ा वर्ग, दलित और मुस्लिम समुदाय से जुड़े कई उपजातियों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।
किन समुदायों का जिक्र?
अखिलेश यादव ने अपने बयान में कई सामाजिक समूहों का उल्लेख किया, जिनमें कुर्मी, यादव, मौर्य, लोधी, पासी, निषाद, मल्लाह, कश्यप, कोरी, अंसारी, राजभर, गुर्जर, गडेरिया, सैनी, तेली, धोबी और अन्य कई जातियां शामिल हैं। उनका दावा है कि इन समुदायों के नाम व्यवस्थित ढंग से सूची से हटाए जा रहे हैं।
बीजेपी पर गंभीर आरोप
समाजवादी पार्टी के प्रमुख ने आरोप लगाया कि यह सब BJP के इशारे पर हो रहा है। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनावों को आरक्षण के मुद्दे पर टालना भी इसी रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि सत्तारूढ़ दल को गांव-गांव में विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी मांग की कि सुनवाई केंद्र 1-2 किलोमीटर के दायरे में बनाए जाएं ताकि प्रभावित मतदाता आसानी से अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।
चुनाव आयोग और प्रशासन पर सवाल
अखिलेश यादव ने कहा कि जिन लोगों के नाम काटे जा रहे हैं, उनकी समस्या का मूल कारण जातिगत पहचान से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन और चुनाव आयोग को ढाल बनाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश हो रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मुद्दे पर न्याय नहीं मिला तो पार्टी जिला प्रशासन से लेकर Supreme Court of India तक कानूनी लड़ाई लड़ेगी।
यह विवाद आगामी चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है।
