- डॉन के खात्मे से खुला खौफनाक राज
रंजन कुमार सिंह
सिटी सेंटर जिम के बाहर शुक्रवार सुबह जो खून बहा, उसकी जड़ें उत्तराखंड में नहीं बल्कि झारखंड के अंडरवर्ल्ड में दबी हैं। जिसे लोग स्टोन क्रेशर संचालक समझ रहे थे, वह दरअसल झारखंड के कुख्यात गैंग का मास्टरमाइंड और गुरु विक्रम शर्मा था।
एक अपराधी जो ‘अदृश्य’ था
पुलिस सूत्रों और आरटीआई से जो चौंकाने वाली जानकारी मिली है, वह होश उड़ा देने वाली है: 50 से अधिक मुकदमे, 30 मर्डर। विक्रम शर्मा पर हत्या, रंगदारी और अपहरण के 50 से अधिक केस दर्ज थे। थ्री ‘पी’ (3P) का प्रबंधक पुलिस, पॉलिटिशियन और प्रेस को मैनेज करने में माहिर विक्रम ने अपराध को ‘कॉरपोरेट’ स्टाइल में चलाया। झारखंड के सबसे बड़े डॉन अखिलेश सिंह को मार्शल आर्ट और अपराध की दुनिया में ‘हार्डकोर’ बनाने वाला विक्रम ही था।
मार्शल आर्ट, चाइनीज फिल्में और जुर्म का साम्राज्य
विक्रम शर्मा ब्लैक बेल्टर था। वह अपने गुर्गों को फौलादी बनाने के लिए उन्हें चाइनीज मार्शल आर्ट फिल्में दिखाता था ताकि वे गुरु के लिए जान दे सकें। 2004 से 2009 के बीच उसने पुलिस और राजनीति में ऐसी पैठ बनाई कि उसके गुर्गे अपराध करते और पुलिस विरोधियों को जेल भेजती। संपत्ति के लालच में अपनों का खून विक्रम पर अपने ही साथी ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा की हत्या का आरोप था। हैरानी की बात यह है कि हत्या के बाद उसने अशोक की पत्नी की शादी अपने छोटे भाई से करा दी ताकि करोड़ों की संपत्ति पर कब्जा रहे।
विक्रम शर्मा हत्याकांड: भाई ने लिखी भाई की मर्डर की स्क्रिप्ट
दून बना ‘गैंगवार’ का नया अखाड़ा?
झारखंड से भागकर रेसकोर्स (देहरादून) में रह रहा विक्रम हथियार के साथ जिम गया था, उसे हमले का अंदेशा था। लेकिन हमलावरों ने उसे संभलने और पिस्टल छू सकने का भी मौका नहीं दिया। सवाल यह है कि क्या बाहरी गैंग्स ने देहरादून को अपनी ‘सेफ हेवन’ और अब ‘बैटलग्राउंड’ बना लिया है?
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30 मर्डर का आरोपी दून में इतने समय से कैसे सुरक्षित रह रहा था?
आमजन की चिंता शांत देहरादून अब ‘ऑर्गनाइज्ड क्राइम’ की आग में झुलस रहा है। पुलिस के लिए अब चुनौती सिर्फ हत्यारों को पकड़ना नहीं, बल्कि इस गहरे ‘गैंगवार नेटवर्क’ को उखाड़ना है।
