बारामती । महाराष्ट्र की राजनीति में दशकों से प्रभाव रखने वाला पवार परिवार एक बार फिर सुर्खियों में है। पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद पहली बार पूरा पवार परिवार सार्वजनिक रूप से एक साथ नजर आया, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। बारामती में आयोजित दशक्रिया विधि के दौरान सामने आई तस्वीरों ने एनसीपी के भविष्य को लेकर नई अटकलों को जन्म दे दिया है। इन तस्वीरों में एनसीपी (शरद पवार गुट) प्रमुख शरद पवार अपनी पत्नी प्रतिभा पवार के साथ बैठे नजर आए, जबकि उनके सामने नई पीढ़ी के चेहरे—पार्थ पवार, रोहित पवार और युगेन्द्र पवार—मौजूद थे। सबसे ज्यादा चर्चा का विषय यह रहा कि पार्थ पवार और रोहित पवार को शरद पवार के साथ गंभीर बातचीत और सलाह-मशविरा करते देखा गया।
ये भी पढ़े
नहीं रहे ‘मैरीकॉम’ के बॉक्सर कोच थापा, 68 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
दुख की इस घड़ी में परिवार की एकजुटता को केवल पारिवारिक औपचारिकता नहीं माना जा रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात सिर्फ संवेदनाओं तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें भविष्य की राजनीतिक दिशा पर भी चर्चा हुई हो सकती है। खासतौर पर पार्थ पवार का शरद पवार के करीब आना कई संकेत दे रहा है। गौरतलब है कि अजित पवार के अलग होने के बाद एनसीपी दो गुटों में बंट गई थी। जहां एक ओर अजित पवार गुट सत्ता में मजबूत हुआ, वहीं शरद पवार का राजनीतिक आधार कमजोर पड़ता नजर आया। हालांकि, शरद पवार लगातार यह संकेत देते रहे हैं कि पार्टी को नई पीढ़ी के हाथों में सौंपने का समय आ गया है।
ये भी पढ़े
बारामती की इन तस्वीरों को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्थ और रोहित पवार का शरद पवार के साथ एक कतार में बैठना यह संकेत देता है कि भविष्य में नेतृत्व की भूमिका इन्हीं युवाओं को सौंपी जा सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टियों का विलय संभव है? अजित पवार के निधन के बाद पार्टी और परिवार दोनों में जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे भरने के लिए शरद पवार एकजुटता का रास्ता अपना सकते हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पवार परिवार की एकता महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है। अगर परिवार फिर से एकजुट होता है, तो एनसीपी को नई ताकत मिल सकती है और राज्य की सियासत में नए समीकरण बन सकते हैं।
