नई दिल्ली। कभी जिन देशों को फीके और सादे खाने के लिए जाना जाता था, आज वहीं भारतीय मसालों का तीखापन लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। न्यूयॉर्क से लेकर बर्लिन तक अब रेस्टोरेंट में लोग कोल्हापुरी, आंध्रा और केरल स्टाइल मसालेदार स्वाद की डिमांड कर रहे हैं। भारतीय मिर्च और मसालों का जादू अब सात समंदर पार भी लोगों की जुबान पर चढ़ चुका है।
फीकापन का तीखापन की ओर बदला स्वाद का ट्रेंड
पश्चिमी देशों में भारतीय भोजन अब सिर्फ करी और नान तक सीमित नहीं रह गया है। लोग अब ऐसे फ्लेवर चाहते हैं जो स्वाद के साथ रोमांच भी पैदा करे। ‘डेटासेंशियल: 2025 फूड ट्रेंड्स’ रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में करीब 39 प्रतिशत लोग खास तौर पर दक्षिण भारतीय और केरल के मसालेदार व्यंजनों को आजमाने के लिए उत्सुक हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तीखा स्वाद अब सिर्फ खाना नहीं, बल्कि एक अनुभव बन चुका है।

पिज्जा और बर्गर में भी घुल रहा भारतीय मसालों का स्वाद
परसिस्टेंस मार्केट रिसर्च की रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका और यूरोप में बसे भारतीय समुदाय ने वहां के खानपान को पूरी तरह नया रंग दे दिया है। आज अमेरिका के लगभग 95 प्रतिशत रेस्तरां अपने मेन्यू में किसी न किसी रूप में तीखा भोजन जरूर शामिल कर रहे हैं। अब पिज्जा में लाल मिर्च की चटनी, बर्गर में मसालेदार सॉस और स्नैक्स में देसी तड़के का स्वाद आम हो गया है।
बड़ी कंपनियां भी अपना रही देसी फ्लेवर
भारतीय मसालों की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए पेप्सिको, मैकडॉनल्ड्स जैसी दिग्गज कंपनियां भी अपने प्रोडक्ट्स में तीखे भारतीय स्वाद शामिल कर रही हैं। युवाओं को आकर्षित करने के लिए स्नैक्स और सॉस में दुनिया की सबसे तीखी मिर्चों जैसे ‘घोस्ट पेपर’ और ‘कैरोलिना रीपर’ का इस्तेमाल किया जा रहा है। शोधकर्ता इस बदलाव को ‘सेंसरी इंजीनियरिंग’ कह रहे हैं, जिसमें स्वाद के जरिए खाने के अनुभव को और रोमांचक बनाया जा रहा है।
तीखा खाना बना मॉडर्न लाइफस्टाइल का हिस्सा
कालसेक की एक स्टडी के अनुसार विदेशी ग्राहक अब सामान्य तीखेपन से संतुष्ट नहीं हैं, बल्कि वे खास भारतीय मसालों वाला तीखापन चाहते हैं। जिस तरह कभी जैज म्यूजिक पश्चिमी दुनिया में स्टाइल की पहचान था, उसी तरह आज मसालेदार खाना आधुनिकता का नया ट्रेंड बन चुका है।

स्वाद से आगे बढ़कर बन गया ग्लोबल ट्रेंड
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, एशियाई देशों की बढ़ती वैश्विक ताकत के साथ उनके व्यंजन भी पूरी दुनिया में लोकप्रिय हो रहे हैं। अब लोग खाने को सिर्फ भूख मिटाने का जरिया नहीं, बल्कि एक साहसिक अनुभव की तरह देखते हैं जहां तीखापन एक चुनौती बन गया है।
भारतीय मसालों का बाजार करेगा रिकॉर्ड तोड़ विस्तार
IMARC के अनुमान के अनुसार साल 2034 तक भारतीय मसाला उद्योग का बाजार करीब 6.47 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यह साफ संकेत है कि आने वाले वर्षों में वैश्विक फूड इंडस्ट्री का स्वाद भारतीय मसालों के इर्द-गिर्द ही घूमने वाला है।
