देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने आज सचिवालय में पूंजीगत व्यय, केंद्र पोषित योजनाओं, बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं, नाबार्ड पोषित योजनाओं और विभिन्न विभागों की व्यय योजनाओं की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि पूंजीगत व्यय, केंद्र पोषित व नाबार्ड द्वारा वित्तपोषित योजनाओं के प्रस्ताव समय पर शासन को उपलब्ध कराए जाएं। प्रतिपूर्ति से जुड़े सभी दावे निर्धारित समयसीमा के भीतर किए जाएं। उन्होंने कहा कि जो विभाग अच्छा और प्रभावी कार्य कर रहे हैं, उन्हें अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने सभी परियोजनाओं को समय पर पूर्ण करने के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित कर नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने वित्त एवं नियोजन विभाग को कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए स्वतंत्र तृतीय पक्ष मूल्यांकन की एक मजबूत व्यवस्था विकसित करने को कहा। साथ ही, लापरवाही पाए जाने पर उत्तरदायित्व तय करते हुए संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। जिन परियोजनाओं में तृतीय पक्ष मूल्यांकन का प्रावधान नहीं है, उनमें तत्काल यह व्यवस्था लागू करने को कहा गया।
सिंचाई विभाग की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि प्रदेश की वर्तमान लगभग 15 प्रतिशत सिंचित भूमि को आगामी पांच वर्षों में बढ़ाकर 30 प्रतिशत किया जाए। इसके लिए नए बैराज, नहरों और अन्य सिंचाई संरचनाओं के निर्माण पर कार्य करने के निर्देश दिए गए। पायलट परियोजना के रूप में लगाए गए फव्वारा सिंचाई तंत्र को प्रदेशभर में लागू करने तथा लघु सिंचाई योजनाओं के अंतर्गत उच्च गुणवत्ता वाले प्रस्ताव तैयार करने पर भी जोर दिया गया। पेयजल योजनाओं को लेकर मुख्य सचिव ने जल संस्थान और जल निगम को निर्देश दिए कि सभी योजनाओं को शून्य कार्बन उत्सर्जन की दिशा में विकसित किया जाए। उन्होंने सौर ऊर्जा संयंत्रों को बैटरी प्रणाली से जोड़ने, जलवायु परिवर्तन निधि के उपयोग और सौर ऊर्जा को ऊर्जा स्रोत के रूप में अपनाने के लिए ठोस प्रस्ताव तैयार करने को कहा। साथ ही, सभी सीवेज शोधन संयंत्रों की चौबीसों घंटे वास्तविक समय निगरानी की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए।
