ऑस्ट्रेलिया में आयोजित ‘प्रशांत क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन’ में जुटे कई देशों के विद्वान

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शाश्वत तिवारी

ब्रिस्बेन। ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में प्रथम ‘प्रशांत क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन’ का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ न्यूजीलैंड, फिजी एवं प्रशांत द्वीप राष्ट्रों से हिंदी के विद्वानों, शिक्षाविदों और साहित्य प्रेमियों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। इस दौरान हिंदी शिक्षण, इसके विस्तार और समसामयिक विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।कार्यक्रम का आयोजन कैनबरा स्थित भारतीय उच्चायोग तथा ब्रिस्बेन स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास के संयुक्त तत्वावधान में हुआ, जिसमें भारतीय विदेश मंत्रालय की सचिव (दक्षिण) डॉ. नीना मल्होत्रा विशेष रूप से भारत से पधारीं। कार्यक्रम का सफल संचालन भारतीय राजदूत गोपाल बागले के मार्गदर्शन में हुआ। समारोह का शुभारंभ सरस्वती वंदना व वंदेमातरम के समूह गान से हुआ। दिन भर चले विभिन्न सत्रों में हिंदी के विस्तार पर विचार-विमर्श हुआ।

भारतीय उच्चायोग ने एक बयान में बताया कि सम्मेलन के प्रथम पैनल में प्रवासी समुदाय एवं संस्थान, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हिंदी के सुदृढ़ीकरण की दिशा में कार्य पर चर्चा हुई। इस दौरान हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता की उपयोगिता पर भी विचार साझा हुए। वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रम में कविता, रंगमंच एवं नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। न्यूजीलैंड स्थित भारतीय उच्चायोग ने 19 जनवरी को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा ब्रिस्बेन में आयोजित प्रशांत क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन सफल रहा। सचिव(दक्षिण) नीना मल्होत्रा और हाई कमिश्नर गोपाल बागले ने दीप प्रज्वलन कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। सचिव(दक्षिण) ने अपने संबोधन में प्रशांत क्षेत्र में हिंदी की स्थिति और वेलिंगटन में हिंदी कक्षाओं की जानकारी दी।

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बता दें कि विदेशों में स्थित भारतीय मिशन हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करते रहते हैं। हाल ही में ‘विश्व हिंदी दिवस’ के अवसर पर विदेशों में भारतीय दूतावासों और सांस्कृतिक केंद्रों द्वारा हिंदी के वैश्विक प्रचार-प्रसार के लिए विशेष कार्यक्रमों, व्याख्यानों, कवि सम्मेलनों और सांस्कृतिक उत्सवों का आयोजन किया गया था। इन कार्यक्रमों में विदेशों में बसे भारतीय मूल के नागरिकों के अलावा स्थानीय लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।

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