- वैद्यता को लेकर चुनाव आयोग पहुंचा दोनों गुट
- विशेष सम्मेलन में गगन थापा को चुना गया नया अध्यक्ष
उमेश चन्द्र त्रिपाठी
काठमांडू। नेपाली राजनीति में बुधवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला जब देश की सबसे पुरानी पार्टी नेपाली कांग्रेस औपचारिक रूप से तीसरी बार दो हिस्सों में बंट गई। पार्टी अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा और महासचिवों गगन थापा तथा विश्व प्रकाश शर्मा के बीच चल रही बातचीत किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद विभाजन तय हो गया। बुधवार को आयोजित विशेष सम्मेलन में गगन थापा को सर्वसम्मति से नेपाली कांग्रेस का नया अध्यक्ष चुन लिया गया। थापा 49 वर्ष के हैं और उन्हें पार्टी में युवा चेहरे के तौर पर देखा जाता है। वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक वह अध्यक्ष पद के लिए इकलौते उम्मीदवार थे, जिस कारण चुनाव की जरूरत नहीं पड़ी। असल में पाटी में टकराव तब और गहरा गया जब गगन थापा और विश्व प्रकाश शर्मा ने शेर बहादुर देउबा से अध्यक्ष पद छोड़ने और आगामी संसदीय चुनाव न लड़ने की मांग की। दोनों नेताओं का कहना था कि यह कदम सितंबर में हुए युवा आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले जेन-Z युवाओं की भावनाओं के सम्मान में जरूरी है। ‘जेन जेड’ उस पीढ़ी को कहा जाता है जो 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई है। यह वह युवा वर्ग है जो तकनीक, इंटरनेट और सोशल मीडिया के साथ बड़ा हुआ है।
नेपाल की सबसे पुरानी पार्टी नेपाली कांग्रेस 1950 में गठन के बाद तीसरी बार टूट गई है। इससे पहले पार्टी 1953 में विशेश्वर प्रसाद कोइराला और मातृका प्रसाद कोइराला के टकराव के कारण और 2002 में माओवादी विद्रोह के दौर में प्रतिनिधि सभा भंग किए जाने के बाद विभाजित हो चुकी है। ताजा टूट को पार्टी के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है। गगन थापा ने पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में कहा कि अब नेपाली कांग्रेस को अपना चेहरा बदलना होगा। उन्होंने कहा कि पार्टी उस सरकार का हिस्सा रही है जिसने के पी शर्मा ओली के नेतृत्व में युवाओं के आंदोलन को दबाने की कोशिश की। थापा के मुताबिक अगर पार्टी को दोबारा जनता का भरोसा जीतना है तो उसे नए नेतृत्व और नई सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। विवाद उस समय चरम पर पहुंच गया जब असंतुष्ट गुट ने 11 और 12 जनवरी को काठमांडू के भृकुटी मंडप में विशेष सम्मेलन आयोजित किया। देउबा गुट इस सम्मेलन के खिलाफ था और वह आम चुनाव के बाद मई में 15 वां महाधिवेशन कराने के पक्ष में था।
बातचीत टूटने के बाद देउबा गुट ने एक नोटिस जारी कर गगन थापा, विश्व प्रकाश शर्मा और संयुक्त महासचिव फार्मुल्लाह मंसूर को पार्टी से निष्कासित करने की घोषणा कर दी। इसके जवाब में शर्मा ने कहा कि विशेष सम्मेलन ने इस निष्कासन को खारिज कर दिया है और असली पार्टी वही है जिसे सम्मेलन का समर्थन हासिल है। सम्मेलन को संबोधित करते हुए गगन थापा ने दावा किया कि उनके गुट को 60 प्रतिशत से ज्यादा प्रतिनिधियों का समर्थन मिला है। उन्होंने देउबा के नेतृत्व वाली केंद्रीय समिति को भंग करने का भी ऐलान किया। जानकारी के मुताबिक नेपाली कांग्रेस के दोनों गुट एक ही दिन चुनाव आयोग पहुंचे हैं और अब पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर कानूनी लड़ाई तय मानी जा रही है। इस विभाजन को नेपाल की राजनीति में एक बड़े मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जिसका असर आने वाले चुनावों पर साफ नजर आ सकता है।
