राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार को दिल्ली स्थित संघ कार्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान संगठन की वैचारिक यात्रा और विकास को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संघ अपने मूल स्वरूप में कोई बदलाव नहीं कर रहा है, बल्कि समय के साथ धीरे-धीरे विकसित हो रहा है और समाज के सामने अधिक स्पष्ट रूप में सामने आ रहा है।
यह कार्यक्रम आरएसएस की 100 वर्ष की यात्रा पर आधारित आगामी फिल्म ‘शतक’ के गीतों के एल्बम लॉन्च के अवसर पर आयोजित किया गया था। इस मौके पर प्रसिद्ध गायक सुखविंदर सिंह, फिल्म निर्देशक आशीष मल्ल, सह-निर्माता आशीष तिवारी और वरिष्ठ संघ पदाधिकारी भैयाजी जोशी भी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि जब कोई संगठन लंबी अवधि तक समाज के बीच कार्य करता है, तो लोगों को उसके स्वरूप में बदलाव दिखाई देता है। लेकिन वास्तव में यह बदलाव नहीं, बल्कि उसके विकास की स्वाभाविक प्रक्रिया होती है। उन्होंने कहा कि संघ अपने मूल सिद्धांतों पर कायम है और समाज सेवा, राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक चेतना जैसे उद्देश्यों से कभी विचलित नहीं हुआ है।
संघ प्रमुख ने संगठन के विकास को समझाने के लिए एक उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे एक बीज से अंकुर निकलता है और समय के साथ वह फल-फूल से भरा विशाल वृक्ष बन जाता है, वैसे ही संघ भी अपने मूल विचारों से जुड़ा रहते हुए विभिन्न रूपों में सामने आता है। उन्होंने कहा कि बीज और वृक्ष दिखने में अलग होते हैं, लेकिन उनकी आत्मा एक ही होती है। इस दौरान मोहन भागवत ने आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉक्टर साहब जन्मजात देशभक्त थे और बचपन से ही उन्होंने अपना जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित कर दिया था। भागवत ने बताया कि बहुत कम उम्र में माता-पिता को खोने के बावजूद हेडगेवार का व्यक्तित्व बेहद संतुलित और दृढ़ रहा।
उन्होंने कहा कि इतने बड़े व्यक्तिगत आघात के बाद भी डॉ. हेडगेवार का मानसिक संतुलन और वैचारिक स्पष्टता बनी रही, जो उनके मजबूत चरित्र और मानसिक स्वास्थ्य को दर्शाता है। मोहन भागवत ने यह भी कहा कि डॉ. हेडगेवार की मनोवैज्ञानिक दृढ़ता आज के समय में अध्ययन और शोध का विषय हो सकती है।
