मनुस्मृति मानव समाज का प्रथम संविधान

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  •  नये संविधान का अनुपालन करो
  • पुरानै संविधान का विरोध नासमझी
     
  • चार वर्ण को सवा सौ मे क्यो,.. बांटा?
  • आरक्षण खत्म क्यो नही़ करते?
  • सबको समानता का अधिकार क्यो नही़?
  • नये पाख़ड वाद का विरोध क्यों नही़ ?
  • दुहरे मापदंड बदलो-धर्म जाति के नाम पर राजनीति बंद हो
बलराम कुमार मणि त्रिपाठी
बलराम कुमार मणि त्रिपाठी

जिस तरह आजादी के बाद स्वतंत्र लोकतांत्रिक देश भारत का संविधान तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता मे ‘संविधान सभा’ ने रचा,उसी तरह सृष्टि के प्रारंभ मे मनु -शतरुपा के द्वारा उत्पन्न संतानों के लिए अर्थात मनुष्य के लिए उन्होंने ‘आचार संहिता’ सुनिश्चित करते हुए #मनुस्मृति नाम पहला मानव समाज का संविधान रचा था।

तत्कालीन समाज के लिए वह एक आदर्श संविधान था,जिसमे कार्य के अनुसार मानवों का वर्गी करण करते हुए राज सत्ता के लिए अनुशासन और प्रजा के लिए आचरण और अनुशासन लिखे। अपराध के लिए दंड विधान,विवाह के प्रकार और उसकी मर्यादा आदि पर बिस्तार से प्रकाश डाला। उसमे बुराई क्या थी?? तत्कालीन समाज के लिए वह आवश्यक संविधान था और शासन चलाने वाले राजा के लिए भी जिसमें विशेष निर्देश थे। समय समय पर परिस्थितियां बदलीं.. शासन सत्ता बदलती रही और संविधान मे भी बदलाव होता रहा। जिसका पालन करना हमारे लिए आवश्यक रहा। मेरी समझ से वे लोग नासमझ है जो पुराने संविधान की पुस्तक का अपने निजी स्वार्थो के कारण विरोध करते है।

किसी वैज्ञानिक ने पुराने वेज्ञानिक के शोध के बाद कुछ नया शोध किया तो आज उस नये शोध के आगे चिंतन होरहा है। ऐसे मे पिछला शोध गलत था उसे फूंकने की कोई कोशिश करे तो यह नासमझी या मूर्खता नहीं तो और क्या है?  उन्होंने कर्म के अनुसार चार वर्णो मे विभाजित किया जब कि आज आपने सवा सौ से ऊपर जातियां बना डालीं। यह क्या है,,? आरक्षण का लाभ उठाने के लिए आप स्वयं अपनी जाति को बीसी ओबीसी, एस सी और एससी- एसटी मे लाने के लिए बेताब हो क्यों ? क्यों समानता की बात नहीं करते? रोटी बेटी के संबंध के लिए बड़े उतावले हो किंतु आरक्षण मुक्त समान व्यवस्था को लागू करंने पर जोर क्यों नहीं देते? अपनी ही सरकार के लोग लोकत़त्र के बावजूद धर्म,जाति,भाषा,प्रांत के नाम पर अलगाव बनाये रखना चाहते है़..भला क्यों,? महात्मा गांधी जिन्होंने देश की आजादी मे अहम भूमिका निभाते हुए.. सर्व धर्म समभाव की चर्चा की। अस्पृश्यता का मुहिम चलाया। उनका विरोध क्यों? छुआ छूत का भेद भाव आज बहुत कुछ मिट चुका है। लोग होटल मे एक टेबुल पर बैठ कर खाने लगे हैं। फिर भी आप जाति और धर्म के नामपर नफरत फैलाने और एक दूसरे को नीचा दिखाने मे लगे हो क्यों? वोट पाने के लिए कितना नीचे गिरोगे? बेहतर हो समाज की संरचना मे बदलाव करो और नये परिवेश मे संविधान के अनुसार आचरण करो.. मनुस्मृति के नाम पर छाती न पीटो..आज के संविधान मे आरक्षण मुक्त सर्वसमाज के लिए आदर्श अनुच्छेद लाओ और उसका पालन करो।

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