बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के लिए हालात लगातार चिंताजनक होते जा रहे हैं। सुनामगंज जिले में जॉय महापात्रो की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। परिवार का आरोप है कि उन्हें पहले पीटा गया और फिर जहर देकर मार डाला गया। इलाज के दौरान अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
यह कोई अकेली घटना नहीं है। हाल के दिनों में हिंदू समुदाय को निशाना बनाकर की गई हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं। नरसिंगदी में एक हिंदू व्यक्ति की हत्या, जशोर में पत्रकार राणा प्रताप की गोली मारकर हत्या और मयमनसिंह में दीपू चंद्र दास को भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डाला जाना—ये सभी घटनाएं अल्पसंख्यकों की असुरक्षा को उजागर करती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कानून व्यवस्था की कमजोर स्थिति और आरोपियों पर सख्त कार्रवाई न होने से कट्टरपंथी तत्वों के हौसले बुलंद हैं। मानवाधिकार समूह लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि यदि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
31 दिसंबर को व्यापारी खोकन चंद्र दास पर हुए हमले ने भी प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए। तीन दिन तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद उनकी मौत हो गई, लेकिन अब तक मामले में कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
हिंदू समुदाय का कहना है कि वे डर और असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं। कई परिवार अपने बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि त्वरित न्याय, दोषियों की गिरफ्तारी और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की जरूरत है।
