
- फरेंदा विकास से कोसों है दूर
- फरेंदा को जिला बनाना जरुरी
- किस विकास के नाम पर मांगेंगे वोट
मुझे खुशी है,फरेंदा के विकास का मुद्दा कुछ वहां के प्रबुद्ध लोग उठा रहे हैं। ऐसी जनता की मांग भी है। सांसद पंकज चौधरी कई बार सांसद रहे,केंद्रीय मंत्रिमंडल मे स्थान भी मिला और वर्तमान मे प्रदेश अध्यक्ष मी हैं। गणेश शुगर मिल ही फरेंदा की एक बड़ी पहचान थी,जिसे वे चालू नहीं करा पाये। न तो नानी ढाथा व फरेंदाखुर्द ढाला पर ओवर वृज अथवा अंडर पास बनवा सके और न केंद्रीय विद्यालय या राजकीय इंटर कालेज या राजकीय डिग्री कालेज खुलवा सके। आनंदनगर जं होने के बावजूद इसे जिला बनाने मे भी उन्होने कोई उत्सुकता दिखाई। यहां से विधायक भी भाजपा का रहे किंतु उन्होंने यहां के विकास पर कोई ध्यान नहीं दिया। जिससे हार का सामना करना पड़ा।
गोरखपुरम़डल मे विकास की झड़ी लग रही वहीं फरेदा आजादी के बाद गांव बन कर रह गया। एक मिल थी वह भी खंडहर बन कर रह गई।जो रौनक चालीस साल तक रही वह भी वही बरकरर रह सकी। यह शोचनीय बात है। यहां प्रोफेसल शिब्बन लाल सक्सेना की स्मृति मे एक एडेड महाविद्यालय ( लाल बहादुर स्नातकोत्तर महाविद्यालय)है… आजादी के बाद बना एक राजकीय गर्ल्स इंटर कालेज है.. लड़को के लिए वह भी नहीं। न तो सार्वजनिक पुस्तकालय है और न एक भी पार्क। यह कौन सा विकास है।
