नेपाल में पर्यटकों का सबसे बड़ा श्रोत बना भारत

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  • नेपाल में भारतीयों की बादशाहत को हिला नहीं पाया चीन
  • ड्रैगन का पाँच लाख टूरिस्ट  नेपाल भेजने का वादा निकला खोखला
  • चीनी पर्यटकों को पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लाने की योजना फेल

उमेश चन्द्र त्रिपाठी

काठमांडू। नेपाल में भारत के बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए चीन की हर कोशिश नाकाम साबित होती जा रही है। केपी ओली के जरिए भारत के खिलाफ अभियान चलाने वाले चीन ने नेपाल से वादा कर उसे बड़ा धोखा दिया है। जून 2024 में चीन ने ऐलान किया था कि ‘विजिट नेपाल’ अभियान चलाएगा ताकि कम से कम 5 लाख चीनी टूरिस्ट साल 2025 में पहुंचे। अब जब साल 2025 बीत चुका है तो चीन के इस ऐलान की पोल खुल गई है। चीन के तमाम दावे के बाद भी चीन से नेपाल आने वाले टूरिस्ट की संख्या बढ़ने की बजाय 6.3 प्रतिशत कम हो गई। साल 2025 में नेपाल में 10 लाख पर्यटक आए जो पिछले साल के मुकाबले एक प्रतिशत ज्यादा है। वहीं भारत की बात करें तो अब भी नेपाल में पर्यटकों का सबसे बड़ा विदेशी स्रोत हिंदुस्तान बना हुआ है।

काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक भारत से साल 2025 में दो लाख 92 हजार से ज्यादा पर्यटक नेपाल पहुंचे। भारत के बाद अमेरिका का नंबर है जहां से एक लाख 12 हजार टूरिस्ट काठमांडू पहुंचे। इसके बाद तीसरे नंबर पर चीन है जहां से मात्र 95 हजार टूरिस्ट नेपाल पहुंचे। वहीं चीन का वादा 5 लाख पर्यटकों को भेजकर भारत को पीछे करने का था। चीन इसके जरिए अपनी साफ्ट पावर कूटनीति को बढ़ाना चाहता था। नेपाल शुरू में चीन के इस ऐलान को सुनकर बहुत खुश हुआ क्योंकि बीजिंग ने किसी और देश के लिए कभी ऐसा ऐलान नहीं किया था। हालांकि जैसे जैसे साल बीतता गया नेपाल की उम्मीद धूमिल होती गई।

नेपाली टूरिज्म बोर्ड का कहना है कि चीनी पर्यटकों के कम आने के पीछे एक बड़ी वजह जेन जी युवाओं का प्रदर्शन भी है। वहीं चीन ने बहुत धूमधाम से पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए चार्टर्ड फ्लाइट शुरू करने का दिखावा किया था। चीन से 128 पर्यटकों को लेकर एक फ्लाइट आई भी लेकिन उसके बाद कोई खास संख्या में पर्यटक नेपाल नहीं आए। इसके बाद सात फ्लाइट आईं लेकिन कम यात्री होने की वजह से इसे बंद कर दिया गया। इससे पोखरा एयरपोर्ट की कमाई को भी झटका लगा जिसे चीन ने भारी भरकम लोन देकर बनाया है। यह एयरपोर्ट अब नेपाल के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक चीन के टूर ऑपरेटरों का कहना है कि उनके देश में नेपाल जाने के लिए कोई डिमांड नहीं है। साल 2013 में पहली बार चीन से एक लाख पर्यटक नेपाल आए थे। इसके बाद नेपाल ने वीजा में कई छूट चीनी नागरिकों को दी लेकिन उसका कोई खास फायदा नहीं हुआ। साल 2019 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नेपाल की यात्रा की लेकिन इसके बाद भी पर्यटकों की संख्या में कोई खास इजाफा नहीं हुआ। ताजा आंकड़े के मुताबिक भारत से भी नेपाल जाने वाले यात्रियों की संख्या में आठ  प्रतिशत की गिरावट आई है। नेपाल टूरिज्म बोर्ड का कहना है कि इसके बाद भी भारत नेपाल के लिए सबसे बड़ा टूरिज्म स्रोत बना हुआ है। साल 2025 में भारत से 2,92,438 यात्री नेपाल पहुंचे। भारत, अमेरिका और चीन के बाद पर्यटकों के मामले में ब्रिटेन, बांग्लादेश, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका और थाईलैंड का नंबर है।

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