सर्किट हाउस की बैठक में टूटा जीवन का सिलसिला…BJP विधायक का आकस्मिक निधन

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उत्तर प्रदेश की राजनीति से शुक्रवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। बरेली जनपद के फरीदपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल का अचानक हार्ट अटैक से निधन हो गया। वह सर्किट हाउस में आयोजित एक आधिकारिक बैठक में शामिल होने पहुंचे थे, जहां अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह की अध्यक्षता में वर्ष 2026 के विकास कार्यों को लेकर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की बैठक चल रही थी। इसी दौरान भोजन के समय डॉ. श्याम बिहारी लाल को असहजता महसूस हुई। वे बैठक से बाहर निकले, लेकिन कुछ ही देर में उनकी हालत गंभीर हो गई। उन्हें पीलीभीत रोड स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज से पहले ही उनका निधन हो चुका था।

राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर

विधायक के आकस्मिक निधन की खबर फैलते ही समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई। सर्किट हाउस से लेकर अस्पताल तक माहौल गमगीन नजर आया। भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मौके पर पहुंचे और घटना पर गहरा दुख जताया।

मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री ने जताया दुख

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधायक के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि फरीदपुर विधानसभा से विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल का आकस्मिक निधन अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोक संतप्त परिवार को संबल देने की प्रार्थना की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया पर शोक संदेश जारी कर कहा कि डॉ. श्याम बिहारी लाल एक कर्मठ और जनसेवा को समर्पित नेता थे। उनके निधन से पार्टी को अपूरणीय क्षति हुई है।

वन मंत्री अरुण सक्सेना ने बताया कि बैठक के दौरान अचानक उनकी तबीयत खराब हुई और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनका निधन हो गया। उन्होंने डॉ. श्याम बिहारी को एक विद्वान और विनम्र नेता बताया।

शिक्षा और राजनीति का अनूठा संगम

डॉ. श्याम बिहारी लाल का जीवन शिक्षा और राजनीति दोनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय रहा। उनका जन्म 1 जनवरी 1966 को शाहजहांपुर जिले में हुआ था। संयोगवश, अपने 60वें जन्मदिन के अगले ही दिन उनका निधन हो गया।

उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से की। 2017 में पहली बार और 2022 में दूसरी बार वे फरीदपुर (आरक्षित) सीट से विधायक चुने गए।

राजनीति के साथ-साथ वे महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष भी रहे। वे पांचाल संग्रहालय के निदेशक और गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य भी थे।

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