
- धुंध और शीतलहरी मे तबियत कुछ नासाज है,
बलराम कुमार मणि त्रिपाठी
सर्दी लगने से सांस बज रही है, खांसी ने वार्ता पर विराम लगाई है..धूप न निकलने और हल्की हवा बाहर नहीं निकलने की सलाह देती है। ऐसे में एक ही जगह कंबव ओढ़ कर बैठकी है। कमरा अधिक ठंढा होता है तो रुम हीटर जला कर ताप लेता हू़ं। कौड़ा तापने का रिवाज नहीं रहा..घर को धुंएं से कालिख करना कोई नहीं चाहता।
हर विभाग सुस्त पड़ रहे…
कुहरे की वजह से ट्रेनै भी काफी विलंब से चलरही है। दिल्ली मे 9घंटे बाद आई गोरखधाम कल सुबह 6.30बजे दिल्ली से चल कर आते आते बारह घंटे लेट हुई,रात 11बजे खलीलाबाद पहुंची। पहले रेल का अलघ बजट होता था। रेल मंत्री बजट पेश करते रेल यात्रा फर सरकार का पूर्ण नियंत्रण था। 2014के बाद रेल बजट पेश करना बंद होगया। रेल मंत्री नाम मात्र के रह गए। दुर्घटनायें होती है रेल मंत्री के कानपर जूं नहीं रेंगता। पहले दुर्घटना का जिम्मेदार खुद को मानते हुए रेलमंत्री के इस्तीफा तक होजाते थे।
प्राईवेटाउजेशन ने प्रगति फ्रीज कर दिया…
मोदी सरकार केआने पर प्राईवेटाईजेशन की ललक बढ़ी और हर मंत्रालय निश्चिंत रहता है। धीरे धीरे हवाई जहाज, भी प्राईवेट कंपनियाओ के हवाले होरहे है। शिक्षा को थमाशा बना ही दिया है। परिषदीय विद्यालय के शिक्षकों को कभी बीएल ओ थौ कभी कुत्ते गिनने मे लगाया जाता है। इस सरकार के शासन काल में शिक्षा का प्राईवेटाईजेशन बढ़ा है। अधिकांश विश्वविद्यालय के वीसी एक खास संगठन के कार्यकर्ता होते हैं।
रोजगार पर चर्चा..? ना बाबा ना…
रोजगार की हालत गड्डमड्ड है,बेरोजगारी पर न तो संसद मे चर्चा होती है और न टीवी पर बहस। हमेशा मृत राजनेताओ की बखिया उधेड़ने और एक दूसरे पर आक्षेप लगाने का दौर पर दौर चलता है। मतलब “विद्या विवादाय धनमदाय शक्ति: परेषाम् पर पीड़नाय..’ ही प्रधान राजनैतिक गतिविधि होचुका है। तुर्रा यह कि भ्रष्टाचार मिटा रहे हैं। नेहरू,गांधी और इंदिरा जी की गलतिया़ सुधारनै ये सरकार आई है।
प्राईवेट जॉब टेंशन भी टेंशन…
इसलिए युवा प्राईवेट जॉब की ओर भाग रहे हैं। जिसमे सेवा सुरक्षा नहीं है। टार्गेट पुरा करने का तनाव बहुत है। हर दोसाल पर कंपनी बदलने पर मजबूर होना पड़ता है। पचास के बाद या गैप होने पर कंपनियां युवाओं को किक आउट करके नये युवाओं को जाब पर रखलेती है। ताकि पैसे कम देने पर उनकी क्षमता का विधिवत दोहन किया जा सके। जिंदगी की भाग दौड़ मे.. गाड़ीफ्लैट सब खरीदे जारहे है किंतु बैंको से कर्ज लेकर…और EMI भरने मे जिंदगी गुजर रही है।


चटक चर्चा: समाज में नहीं दिखाया तो लोग लम्पट कहेंगे
बड़े लोग तरकारी नहीं बोलते, तरकारी बोलने से पोजीशन डाऊन हो जाता है भूलेटन- एकदम भोरे-भोरे खट-खट खट-खट शुरु कर देती हो । भिनसरिया- तो का करें ? गाय माता भाँय-भाँय करने लगती हैं नऽ । भुलेटन- अरे, तो करने दो । भिनसरिया- अजी महराज, एकदम टुकुर-टुकुर ताकते रहतीं हैं, हमसे नहीं नऽ रहा जाता […]