- प्रियंका वाड्रा और प्रशांत की चार घंटे लंबी मीटिंग
नया लुक ब्यूरो
खबर है कि प्रशांत किशोर अपनी पूरी पार्टी का कांग्रेस में विलय करने जा रहे हैं। बदले में शर्त यह रखी गई है या तो बिहार कांग्रेस की कमान, या फिर राज्यसभा की सीट चाहिए। यानी “सिस्टम बदलने” की दुकान और अंदर से वही पुरानी पावर पॉलिटिक्स। भारत में जो भी कहता है कि “मैं राजनीतिक सिस्टम बदलने आया हूँ”, असल में वही मेमने की खाल में छुपा भेड़िया निकलता है। सबसे बड़ा मौकापरस्त, सबसे बड़ा लुच्चा।
देश ने इसका एक बड़ा
उदाहरण पहले ही देख लिया है : जो कहता था हम सिक्योरिटी नहीं लेंगे, हम बंगला नहीं लेंगे, हम कार नहीं लेंगे, हम पब्लिक ट्रांसपोर्ट में चलेंगे, हमारे यहाँ इंटरनल लोकपाल होगा और हमारे यहाँ कोई पार्टी प्रमुख एक साल से ज़्यादा नहीं रहेगा आदि इत्यादि। लेकिन सत्ता में आते ही सरकारी संसाधनों का ऐसा बेदर्दी से निर्भया काण्ड किया कि बाकी सब रिकॉर्ड टूट गए।
चेहरे बदलते हैं, नारे बदलते हैं, लेकिन राजनीति का चरित्र वही रहता है।
इसलिए सिस्टम बदलने का दावा करने वालों से सबसे ज़्यादा सावधान रहने की ज़रूरत है। चुनाव रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर बिहार विधानसभा चुनाव में जन सूरज पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं में लौट आए हैं। सूत्रों के मुताबिक पीके ने हाल ही में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ एक बंद कमरे में बैठक की, जिससे राजनीतिक हलकों में नई अटकलें लगने लगी हैं। बैठक लगभग दो घंटे तक चली, जिसमें दोनों ने उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे उत्तर भारतीय राज्यों के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा की। सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि बीते दिन प्रशांत किशोर ने प्रियंका गांधी से मुलाकात की और दोनों के बीच लगभग दो घंटे तक बैठक चली। कांग्रेस से किनारा करने के तीन साल बाद प्रशांत किशोर का नाम फिर से पार्टी के साथ जोड़ा जा रहा है।
बिहार चुनाव में प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी ने 238 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। वहीं, कांग्रेस पार्टी के हिस्से में सिर्फ छह सीटें ही आईं हैं। प्रशांत किशोर ने 2021 में कांग्रेस पार्टी को फिर से संगठित करने का प्रस्ताव पेश किया था। इस दौरान प्रशांत किशोर और कांग्रेस नेताओं के बीच मुलाकात का सिलसिला जारी था। अप्रैल 2022 में उन्होंने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के सामने इस प्लान का खाका पेश किया। इस दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी मौजूद थे। बैठक के बाद सोनिया गांधी ने पैनल गठित करने का फैसला किया था। उस समय प्रशांत किशोर भी कांग्रेस पार्टी का हिस्सा बनना चाहते थे। हालांकि, बाद में इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया, जिसके बाद कांग्रेस और प्रशांत किशोर के बीच मनमुटाव की खबरें सामने आने लगी थीं। हालांकि परिस्थितियां अब अलग हैं।
