मथुरा-वृंदावन के श्री ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में सोमवार का दिन भक्तों के लिए भावनात्मक रूप से बेहद कठिन रहा। रोज़ की परंपरा के अनुसार जहां ठाकुर जी को बाल भोग और शयन भोग अर्पित किया जाता है, वहीं इस बार ऐसा नहीं हो सका। ठाकुर बांके बिहारी जी बिना भोग के ही भक्तों को दर्शन देते दिखाई दिए, जिसने श्रद्धालुओं को चिंतित कर दिया।
इस अप्रत्याशित स्थिति के पीछे कारण प्रशासनिक लापरवाही और वेतन विवाद बताया जा रहा है। मंदिर में भोग तैयार करने के लिए नियुक्त हलवाई ने कई महीनों से वेतन न मिलने के चलते काम करने से मना कर दिया। बताया गया है कि हलवाई को हर महीने करीब 80 हजार रुपये वेतन मिलना तय है, लेकिन भुगतान न होने से वह नाराज चल रहा था।
यह पूरी व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित हाई पावर कमेटी के अंतर्गत आती है। इस कमेटी का उद्देश्य मंदिर की व्यवस्थाओं को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना था, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। लेकिन इस घटना ने कमेटी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सेवायतों और स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि अगर समय पर वेतन दिया जाता, तो भगवान की सेवा बाधित नहीं होती। उनका मानना है कि ठाकुर जी की सेवा से जुड़ी किसी भी व्यवस्था में लापरवाही स्वीकार्य नहीं हो सकती। कई भक्तों ने इसे परंपरा और आस्था के साथ खिलवाड़ बताया है।
क्राउन प्रिंस अल हुसैन ने खुद कार चलाकर पीएम मोदी को जॉर्डन म्यूजियम तक पहुंचाया
घटना के बाद हाई पावर कमेटी के सदस्य मामले पर स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए। वहीं मंदिर प्रशासन का कहना है कि स्थिति को जल्द सामान्य किया जाएगा और आगे से ऐसी समस्या न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
यह मामला केवल एक वेतन विवाद नहीं, बल्कि धार्मिक व्यवस्थाओं की संवेदनशीलता और प्रशासनिक जिम्मेदारी का भी प्रश्न बन गया है। भक्तों को उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी जल्द समाधान निकालेंगे और ठाकुर बांके बिहारी जी की भोग-सेवा परंपरा फिर से पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाएगी।
