
Trump birthday Iran deal : अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कई बार घटनाएं सिर्फ समझौतों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि उनके पीछे भावनाएं, प्रतीक और संदेश भी छिपे होते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प मामला अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया शांति समझौते में देखने को मिला, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच एक बड़ा शांति समझौता लगभग तय हो चुका था, जिसे MoU यानी Memorandum of Understanding कहा जा रहा है। यह समझौता महीनों की बातचीत और तनावपूर्ण हालातों के बाद तैयार हुआ था। लेकिन इसकी टाइमिंग ने सबको चौंका दिया।
आखिर क्यों टली डील की टाइमिंग?
मामला 14 जून का है, जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का जन्मदिन था। उसी दिन इस ऐतिहासिक समझौते पर अंतिम मुहर लगनी थी। लेकिन ईरानी अधिकारियों ने साफ तौर पर इस दिन डील करने से इनकार कर दिया। सूत्रों के अनुसार, ईरानी पक्ष का कहना था कि वे नहीं चाहते कि इतिहास में यह दर्ज हो कि अमेरिका के साथ यह बड़ी डील ट्रंप के जन्मदिन पर हुई थी। उन्हें डर था कि इससे यह संदेश जाएगा कि यह समझौता किसी तरह का “जन्मदिन तोहफा” था।
आधी रात के बाद बदला फैसला
ईरान ने समय को बहुत सोच-समझकर चुना। तेहरान के स्थानीय समय अनुसार जैसे ही रात के 12 बजे और तारीख बदलकर 15 जून हुई, उसी समय इस समझौते को अंतिम रूप दे दिया गया। यह एक प्रतीकात्मक कदम था, जिससे ईरान ने साफ संदेश दिया कि यह डील किसी व्यक्ति विशेष को ध्यान में रखकर नहीं बल्कि राष्ट्रीय हितों को देखते हुए की गई है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने जानबूझकर यह देरी की ताकि राजनीतिक संदेश को नियंत्रित किया जा सके। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा था ट्रंप के जन्मदिन पर कभी डील नहीं होनी चाहिए।” इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है कि क्या समय और तारीख भी कूटनीति का हिस्सा बन सकते हैं?
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