विज्ञान प्रौद्योगिकी सम्मेलन में आपदा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन पर शोधार्थियों ने शोधपत्र प्रस्तुत किए

Untitled 12 copy 22

नया लुक ब्यूरो

देहरादून। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) द्वारा आयोजित विश्व आपदा प्रबंधन शिखर सम्मेलन (WSDM 2025) और 20वां उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन (USSTC) के अंतर्गत आज ग्राफिक एरा डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी, देहरादून में बीस से अधिक विषयों के तकनीकि सत्र आयोजित किए गए] जिसमे उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों और विश्वभर से आए शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इसके साथ ही दस से अधिक विशिष्ट सत्रों का आयोजन किया गया। इस आयोजन ने आपदा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, वैज्ञानिक नवाचार और तकनीकी विकास पर देश-विदेश के विशेषज्ञों को एक मंच प्रदान किया। इसके साथ ही बारह विशेष प्रौद्योगिकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग, सतत वित्तपोषण, आपदा जोखिम वित्त, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, कार्बन इकोसिस्टम, मीडिया की भूमिका, सिक्किम मॉडल और हिमालयी कॉरिडोर विकास जैसे विषय शामिल थे।

ये भी पढ़े

प्रशासनिक अधिकारी मानवता के साथ देश को बेहतरीन सेवाएं दें : राजनाथ

इसके साथ ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से सभी समुदायों को सशक्त बनाने हेतु आपदा जोखिम न्यूनीकरण, सामाजिक विकास, कृषि, स्वास्थ्य सेवाएँ, जैव प्रौद्योगिकी, पर्यावरण तथा अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर भी विशेषज्ञ सत्र आयोजित किए गए। इन दोनों आयोजनों का उद्देश्य वैज्ञानिक सहयोग को प्रोत्साहित करना, साक्ष्य-आधारित आपदा प्रबंधन को मजबूत करना, नीति निर्माण सहयोग और समुदायों को सुरक्षित एवं सुखद भविष्य की दिशा में सशक्त बनाना है। इसके साथ ही वॉटर कॉन्क्लेव का भी आयोजन किया गया जिसमें जलवायु, जल संसाधन और आपदा प्रबंधन के आपसी संबंधों पर चर्चा के लिए विशेषज्ञों ने भाग लिया। प्रो. राजीव सिन्हा, डॉ. राघवन कृष्णन, प्रो. अनिल कुलकर्णी, डॉ. अरविंद कुमार और डॉ. राकेश ने नदियों, मौसमीय परिवर्तन, हिमनदों और जल शासन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए।

सत्र में अवैध रेत खनन, हिमालयी ग्लेशियरों में हो रहे बदलाव और एकीकृत जल नीति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर किया गया। श्री शंकर कोरंगा (उपाध्यक्ष, राज्य स्तरीय वॉटरशेड परिषद) और आईएएस मीनाक्षी सुन्दरम द्वारा विज्ञान और प्रशासन के समन्वय की आवश्यकता पर विचार प्रस्तुत किये गये। इसके साथ ही ट्राइबल कम्यूनिटी के लिए भी विशेष सत्र आयोजित किए गए। इसके अतिरिक्त, आपदा प्रबंधन में मीडिया की भूमिका पर एक विशेष सत्र का भी आयोजन किया गया। जिसमें विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म के प्रतिष्ठित पत्रकारों ने प्रतिभाग किया और आपदा प्रबंधन पर मीडिया की भूमिका पर अपने विचार रखे। 500 से अधिक शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।

Spread the love

Himachal Uttar Pradesh Uttarakhand

लॉन्ग वीकेंड पर पहाड़ों में सैलानियों का सैलाब, जाम से थमी रफ्तार

लॉन्ग वीकेंड पर पहाड़ों में सैलानियों का सैलाब, नैनीताल में कमरे फुल Nainital/Shimla : गांधी जयंती के बाद शनिवार और रविवार की छुट्टियों ने पहाड़ी पर्यटन स्थलों पर सैलानियों की भारी भीड़ बढ़ा दी। उत्तराखंड से लेकर हिमाचल प्रदेश तक प्रमुख पर्यटन और तीर्थ मार्गों पर वाहनों की संख्या अचानक बढ़ने से कई जगह यातायात […]

Spread the love
Read More
Uttarakhand Weather

मानसून की विदाई या आखिरी इम्तिहान?

जाते-जाते भी तबाही मचा रहा मानसून मौसम, चार धाम यात्रा स्थगित बादलों ने फिर याद दिलाई इंसान की औकात                                                                         […]

Spread the love
Read More
Politics Uttarakhand

हरीश रावत के इस्तीफे पर कांग्रेस का BJP पर बड़ा हमला

New Delhi: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत के पार्टी के अहम पदों से इस्तीफे के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। हरीश रावत ने अपने करीबी सहयोगी और PA चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद यह फैसला लिया है। कांग्रेस ने […]

Spread the love
Read More