एक सिपाही कारागार विभाग के आला अफसरों पर भारी!

  • मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भी कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पाया कारागार मुख्यालय
  • बीते 25 साल से घूम फिरकर गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर जेल पर जमाए डेरा

लखनऊ। प्रदेश के कारागार विभाग में एक सिपाही (हेड वार्डर) पूरे सिस्टम पर भारी है। इस सिपाही पर विभाग का कोई भी नियम और कानून लागू नहीं होता है। यह सिपाही बीते 25 वर्षों से घूम फिरकर पश्चिम की गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर और बुलंदशहर जेलों पर ही जमा हुआ है। ऐसा तब है जब एक सिपाही को तीन साल जनपद और सात साल तक ही मंडल की जेलों पर तैनात रहने का नियम है। इस सच का खुलासा मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत से हुआ है। मजे की बात यह है कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भी विभाग के आला अफसर इस सिपाही के खिलाफ आज तक कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पाएं हैं। उधर विभागीय आला अफसर इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं।

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प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजी गई शिकायत से मिली जानकारी के मुताबिक कारागार विभाग का एक हेड वार्डर (सिपाही) पिछले करीब 25 साल से मेरठ परिक्षेत्र की गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर (नोएडा) और बुलंदशहर जेल पर घूम फिरकर कर तैनात है। इस सिपाही के लिए उत्तर प्रदेश जेल नियमावली कोई मायने नहीं रखती है। नियमावली के अनुसार वार्डर हेड वार्डर संवर्ग का कोई भी कर्मचारी एक कारागार पर 07 वर्ष और मंडल की जेलों पर 10 वर्षों तक ही तैनात रह सकता है। विभाग के इस सिपाही पर यह नियम लागू नहीं होता है। यही वजह है कि भ्रष्टाचार और पैसे के दम पर यह सिपाही घूम फिरकर गाजियाबाद, नोएडा और बुलंदशहर जेल पर ही बना हुआ है। इस दबंग सिपाही की अवैध वसूली और उत्पीड़न से बंदियों के साथ ही विभाग के अधिकारी और सुरक्षाकर्मी तीनों ही काफी त्रस्त है। इस हेड वार्डर की दबंगई का यह आलम है कि यह बगैर वर्दी के दर्जनों लोगों को लेकर रात तक जेल में घूमता रहता है। इसकी पुष्टि जेलों में लगे सीसीटीवी से आसानी से की जा सकती है। जो इसको विरोध करता है वह उसका डीओ लिखवाकर उसको जेल से ही हटवा देता है।

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सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत पर इस सिपाही की गतिविधियों की जांच कराई गई। जांच में हेड वार्डर के दो दशक से अधिक समय तक घूम फिरकर चुनिंदा जेलों में तैनात होने की पुष्टि हुई। वर्ष 2023 में हुई इस शिकायत की जांच के बाद मुख्यमंत्री यागी आदित्यनाथ ने निदेश दिया कि लंबे समय तक इन जेलों में तैनात रहने वाले हेड वार्डर (सिपाही) को पूर्वांचल की किसी जेल पर तैनात किया जाए। सीएम के निर्देश को हुए दो साल हो गए हैं। इसके बावजूद यह सिपाही आज भी मेरठ परिक्षेत्र की गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर (नोएडा) और बुलंदशहर जेल पर बना हुआ है। यह सिपाही वर्ष 2004 से 2012 तक गाजियाबाद, 2012 से 2019 तक बुलंदशहर और 2019 से अब तक गौतमबुद्धनगर (नोएडा) जेल पर तैनात है। यह तैनात किसी भी जेल पर रहे लेकिन रहता गाजियाबाद में ही है। यह सिपाही अकूत संपत्ति का मालिक भी है। पत्र में इसकी संपत्ति की जांच कराए जाने की भी मांग की गई है। उधर इस संबंध में जब कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान और प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो इनसे बात नहीं हो पाई।

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प्रदेश के स्वास्थ विभाग के एनएचआरएम में बड़ा घोटाला हुआ था। इस बहुचर्चित घोटाले में तत्कालीन मंत्री समेत कई वरिष्ठ नौकरशाहों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इसमें तत्कालीन मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव से लेकर कई अधिकारी शामिल थे। सूत्रों का कहना है कि गाजियाबाद जेल में मंत्री और नौकरशाहों के जेल में रहने के दौरान यह सिपाही भी उसी जेल पर तैनात था। सूत्रों का कहना है जेल में बंद मंत्री और नौकरशाहों को मनमाफिक सुविधाएं मुहैया कराने में इस सिपाही की अहम भूमिका रही थी। इस सेवा के चलते इस सिपाही के नौकरशाहों से अच्छे संबंध हो गए थे। सूत्रों की माने तो शासन में उच्च पदों पर आसीन इन अधिकारियों की सेवा का लाभ इस सिपाही को आज तक मिल रहा है। विभाग में इसको लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। चर्चा है कि यह सिपाही सुरक्षाकर्मियों के साथ अधिकारियों को तैनात कराने के साथ हटवाने का दम रखता है।

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