लखनऊ में ई-रिक्शा रजिस्ट्रेशन की शर्त हटी: कोर्ट ने कहा, स्थानीय होना जरूरी नहीं

Black White Modern Stylish with Blazer Instagram Post

लखनऊ, उत्तर प्रदेश: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी में ई-रिक्शा के पंजीकरण के लिए ‘लखनऊ का स्थानीय निवासी होना’ अनिवार्य करने वाले आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने इसे संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने अजीत यादव सहित चार याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि 5 फरवरी 2025 को सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (लखनऊ) ने दो प्रमुख प्रतिबंध लगाते हुए आदेश जारी किया था। पहला, जिसके पास पहले से ई-रिक्शा पंजीकृत है, उसे नया पंजीकरण नहीं मिलेगा। दूसरा, केवल लखनऊ में स्थायी निवास करने वाले व्यक्ति ही नए ई-रिक्शा का पंजीकरण प्राप्त कर सकेंगे। याचिकाओं में विशेष रूप से दूसरी शर्त को चुनौती दी गई थी।

राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि किराए के मकान में रहने वाले ई-रिक्शा मालिकों को फिटनेस सर्टिफिकेट की समाप्ति या अन्य नोटिस देने में परेशानी होती है। उनका पता बार-बार बदलता है, जिससे उन्हें तलाशना कठिन हो जाता है। हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार कर दिया और कहा कि किराएदारों को पंजीकरण से वंचित रखने का यह कोई उचित आधार नहीं है।

read more : उत्तराखंड में PRD जवानों का वर्दी भत्ता बढ़ा  https://www.nayalook.com/2025/11/29/uniform-allowance-of-prd-jawans-increased-in-uttarakhand-nayalooknews/

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि ई-रिक्शा की संख्या नियंत्रित करने के वैकल्पिक उपाय मौजूद हैं। उदाहरण के लिए, प्रति वर्ष सीमित संख्या में ही पंजीकरण जारी किए जा सकते हैं या बिना वैध फिटनेस सर्टिफिकेट वाले वाहनों को जब्त किया जा सकता है। लेकिन स्थायी निवास के आधार पर पंजीकरण से इनकार करना मनमाना और असंवैधानिक है। कोर्ट ने इसे समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14), व्यवसाय की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19(1)(g)) और जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का स्पष्ट उल्लंघन माना।

यह फैसला लखनऊ में किराए पर रहने वाले हजारों ई-रिक्शा चालकों और मालिकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। अधिकांश चालक प्रवासी या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से हैं, जो स्थायी मकान नहीं रखते। अब वे भी बिना भेदभाव के पंजीकरण प्राप्त कर सकेंगे।

कोर्ट ने परिवहन विभाग को निर्देश दिया कि पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए और वैकल्पिक नियंत्रण उपायों पर विचार किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय न केवल ई-रिक्शा सेक्टर को बढ़ावा देगा, बल्कि रोजगार सृजन और शहरी परिवहन में सुगमता भी लाएगा।

परिवहन विभाग अब नए दिशा-निर्देश तैयार करने की प्रक्रिया में जुट गया है। इस फैसले से ई-रिक्शा उद्योग में पारदर्शिता और समान अवसर की उम्मीद जगी है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट के निर्णय को ऐतिहासिक बताया और कहा कि यह गरीब चालकों के हक की जीत है।

लखनऊ में ई-रिक्शा परिवहन का प्रमुख साधन है और यह फैसला शहर की यातायात व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

Spread the love

Uttar Pradesh

सोनौली में नाली निर्माण के लिए भाजपाइयों ने अधिशासी अधिकारी को सौंपा मांग-पत्र

उमेश चन्द्र त्रिपाठी Maharajganj : नगर पंचायत सोनौली के वार्ड नंबर-3 में वर्षों से चली आ रही जल निकासी की गंभीर समस्या अब विकराल रूप धारण कर चुकी है। बरसात के मौसम में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि गलियां तालाब में तब्दील हो जाती हैं, जिससे आमजन का घर से निकलना तक मुश्किल […]

Spread the love
Read More
Uttar Pradesh

राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: सुरक्षा में ढिलाई बनी चोरी की वजह? जांच में कई राज बेनकाब

Ayodhya News : राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले की जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। पुलिस की जांच के अनुसार, जिस काउंटिंग रूम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की रकम की गिनती होनी थी, वहीं सुरक्षा नियमों की अनदेखी और कर्मचारियों की कथित लापरवाही के बीच नोटों की गड्डियां गायब […]

Spread the love
Read More
UP Assembly Recruitment Controversy
Uttar Pradesh

प्रशासनिक शुचिता पर सवाल: क्या सचमुच बदला गया यूपी लोक सेवा आयोग का ढांचा?

आचार संहिता के बीच नियुक्ति: संस्थागत भ्रष्टाचार या विशेषाधिकार? ओ.पी. पाल (स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार) UP Assembly Recruitment Controversy : लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधायिका की शुचिता और प्रशासनिक पारदर्शिता उसके सबसे मजबूत स्तंभ होते हैं। लोकतंत्र के स्तंभ तब सबसे ज्यादा डगमगाते हैं, जब जनसेवा और कानून व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने वाली संस्थाओं […]

Spread the love
Read More