ममता SIR के विरोध के नाम पर दे रही हैं घुसपैठियों का साथ

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अजय कुमार                               
अजय कुमार

पश्चिम बंगाल में वहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न) प्रक्रिया का जबर्दस्त विरोध कर रही हैं, क्योंकि उनका मानना है कि यह प्रक्रिया भाजपा द्वारा अल्पसंख्यकों, खासकर मुस्लिम वोटर्स को निशाना बनाने के लिए एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल की जा रही है। ममता का यह भी आरोप है कि SIR के तहत घुसपैठियों को वोटर लिस्ट से हटाने का नाम लेकर असली वोटरों को भी परेशान किया जा रहा है, जिससे उनका वोट बैंक प्रभावित हो सकता है। इस विरोध के पीछे दो पहलू हैं: एक तो ममता का अल्पसंख्यक वोट बैंक बचाने का प्रयास, और दूसरा पश्चिम बंगाल में चुनावी फायदे की नजर से यह विरोध। उन्होंने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए असम जैसे भाजपा शासित राज्यों में इस प्रक्रिया को लागू न करने की निंदा की है। ममता ने चुनाव आयोग को कई बार पत्र लिखकर इस प्रक्रिया को अव्यवस्थित, खतरनाक और बिना तैयारी के बताया है और इसे रोकने की मांग की है।

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पश्चिम बंगाल में BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) को इस प्रक्रिया में काम करने में जो परेशानी हो रही है, वह तृणमूल कांग्रेस और ममता सरकार के SIR विरोध के चलते है। BLO यूनाइटेड फोरम के अनुसार, प्रदेश में BLO को राजनीतिक संरक्षण वाले अपराधी तत्व धमका रहे हैं, जिससे वे अपना काम ठीक से नहीं कर पा रहे। BLO के लिए उचित सुरक्षा, ट्रेनिंग और प्रशासनिक सहूलियत नहीं मिल रही है; वे अपने स्कूलों में भी उपस्थिति दर्ज नहीं करवा पा रहे हैं और उनके ड्यूटी आवंटन में अनियमितता है। इसके अलावा, उन्हें काम का अत्यधिक दबाव, डेटा में त्रुटियां, सर्वर फेलियर जैसी तकनीकी समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं और बिना कारण बताए डिसिप्लिनरी एक्शन की धमकियां मिल रही हैं। ममता सरकार की यह रणनीति BLO को भयभीत करके SIR प्रक्रिया को बाधित करने की है, ताकि फर्जी वोटर सूची में बने रह सकें और घुसपैठियों या फर्जी वोटर्स को हटाने की प्रक्रिया सफल न हो। इस कारण प्रभावी तरीके से केवल पश्चिम बंगाल में ही BLO को काम करने में दिक्कतें आ रही हैं। ममता ने चुनाव आयोग पर भी आरोप लगाया है कि वे SIR प्रक्रिया के तहत लगने वाले दबाव और समस्या को नजरअंदाज कर रहे हैं, जबकि BLO अपने हद से ज्यादा काम कर रहे हैं। चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया के रूप में पुलिस कार्रवाई व अन्य समर्थन नहीं मिल रहा, जिससे BLO और ज्यादा दबाव में हैं।

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इस प्रकार, ममता सरकार का SIR विरोध और BLO पर हो रहे दबाव की जड़ में सीधा राजनीतिक हित है। ममता बनर्जी अल्पसंख्यक वोटरों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ अपने राजनीतिक प्रभाव को बचाने के लिए इस प्रक्रिया का विरोध कर रही हैं। BLO  जो घर-घर जाकर वोटर लिस्ट की जांच कर रहे हैं, उन्हें दंडित करने, धमकाने एवं उनकी सहायता रोकने की क्रियाएं इस विरोध का हिस्सा हैं। पश्चिम बंगाल में यह स्थिति इसलिए विशेष रूप से गंभीर है, क्योंकि यहां के वोट बैंक में अल्पसंख्यकों का बड़ा हिस्सा है और ममता सरकार उसे खोना नहीं चाहती। कुल मिलाकर, ममता बनर्जी का SIR विरोध घुसपैठियों के वोट को लेकर उनकी चिंता के साथ-साथ चुनावी रणनीति का हिस्सा है, जबकि BLO को इस प्रक्रिया में कानूनी, प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव की वजह से काम करना कठिन हो रहा है, और ममता सरकार इन दबावों और बाधाओं को बढ़ा रही है ताकि SIR प्रक्रिया पूरी तरह से प्रभावी न हो सके।

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