विनायक चतुर्थी व्रत आज है जानिए शुभ तिथि और पूजा विधि व महत्व

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राजेन्द्र गुप्ता

विनायक चतुर्थी का दिन भगवान गणेश को समर्पित है। हर महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान गणेश की कृपा मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

विनायक चतुर्थी कब है?

वैदिक पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 24 नवंबर 2025, दिन सोमवार को सुबह 11 बजकर 04 मिनट पर होगा। वहीं, इसका समापन 25 नवंबर 2025, दिन मंगलवार दोपहर 01 बजकर 11 मिनट पर होगा। पंचांग को देखते हुए 24 नवंबर 2025 को विनायक चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 04 मिनट से दोपहर 01 बजकर 11 मिनट तक

विनायक चतुर्थी का महत्व

भगवान गणेश को बुद्धि, ज्ञान और शुभता का देवता माना जाता है। इस व्रत को करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं। उनकी कृपा से घर में सुख, सौभाग्य और धन-समृद्धि का आगमन होता है। किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत करने से पहले गणेश जी की पूजा करने से उस कार्य में सफलता प्राप्त होती है।

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विनायक चतुर्थी पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल रंग के वस्त्र धारण करें।
  • पूजा घर को साफ कर व्रत का संकल्प लें।
  • एक वेदी पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
  • उनके सामने एक घी का दीपक जलाएं।
  • गणेश जी को रोली, अक्षत, लाल फूल और दूर्वा अर्पित करें।
  • गणेश जी को मोदक या लड्डू का भोग लगाए।
  • पूजा के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • विनायक चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें और अंत में कपूर या घी के दीपक से आरती करें।
  • गणेश जी की पूजा में तुलसी पत्र का प्रयोग भूलकर भी न करें।

विनायक चतुर्थी पूजा का फल

विघ्नों का नाश: श्रीगणेश को विघ्नहर्ता कहा गया है। इस दिन की पूजा से जीवन में आ रहे अवरोध दूर होते हैं और सभी कार्य सुगमता से सिद्ध होते हैं।

बुद्धि और निर्णय क्षमता में वृद्धि: विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी माना गया है। यह याददाश्त, एकाग्रता और नेतृत्व क्षमता को बढ़ाता है।

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धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति: गणेश जी को ऋद्धि–सिद्धि के दाता कहा गया है। इस दिन की पूजा से घर में लक्ष्मी प्रवेश करती है और आर्थिक स्थिरता बढ़ती है।

पारिवारिक शांति: यह व्रत परिवार में सद्भाव, प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा लाता है। दांपत्य जीवन की समस्याएँ भी दूर होती हैं।

नए शुभ कार्यों की सफलता: जिन लोगों को नए व्यवसाय या कार्य में बाधाएँ आ रही हों, उन्हें इस तिथि पर विशेष पूजा करने से तुरंत सफलता मिलती है।

 

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