देहरादून। उत्तराखंड के पवित्र चार धामों में से एक बदरीनाथ धाम के अंतर्गत स्थित भगवान आदि केदारेश्वर एवं शंकराचार्य मंदिर के कपाट शनिवार को शीतकाल के लिए औपचारिक रूप से बंद कर दिए गए। यह समापन समारोह पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ, जिसमें पुजारियों द्वारा विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस समापन से बदरीनाथ क्षेत्र में सर्दियों की शुरुआत का संकेत मिलता है, जब भारी बर्फबारी के कारण तीर्थयात्रियों का प्रवेश प्रतिबंधित हो जाता है। अगले वर्ष अप्रैल-मई में ये कपाट पुनः खुलेंगे।
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मंदिरों के बंद होने की प्रक्रिया 21 नवंबर से शुरू हुई थी, जिसमें पहले दिन भगवान गणेश की पूजा के बाद उनके कपाट बंद किए गए। 22 नवंबर को आदि केदारेश्वर मंदिर और शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद करने का विशेष अनुष्ठान संपन्न हुआ। आदि केदारेश्वर मंदिर, जो भगवान शिव के आदि रूप को समर्पित है, और शंकराचार्य मंदिर, आदि गुरु शंकराचार्य की स्मृति में स्थापित है।
समापन के बाद, 26 नवंबर को आदि गुरु शंकराचार्य की आसन सहित कुबेर, उद्धव और रावल जी की मूर्तियों को पांडुकेश्वर एवं जोशीमठ स्थित श्री नृसिंह मंदिर में शीतकालीन निवास स्थान पर स्थानांतरित किया जाएगा। यह प्रक्रिया सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है, जो चार धाम यात्रा की निरंतरता सुनिश्चित करती है। बंद होने की तिथियां विजयादशमी के आसपास निर्धारित की जाती हैं, ताकि सर्दियों में मंदिरों की सुरक्षा बनी रहे।
