जिसने कभी न झुकना सीखा…उसका नाम मुलायम 

Mulayam Singh YadavNayaLookNews
  • धरतीपुत्र की जयंती पर विशेष

अनिल उपाध्याय

लखनऊ। आज मौका और दस्तूर दोनों ही हैं क्योंकि आज यानि 22 नवंबर को समाजवादी पार्टी के संस्थापपक और पूर्व मुख्य मंत्री मुलायम सिंह यादव की जयंती है। अब इस मौके पर कुछ जिक्र करना जरुरी हो जाता है….बात थोड़ा पुरानी है उस समय यूपी में कल्या ण सिंह की सरकार थी और मौका था गणतंत्रता दिवस का उस पर निकलने वाली परेड का। उस वक्त यूपी की झांकी को राजपथ से गुजरने की अनुमति नहीं मिली दरअसल हर राज्यक को झांकी को राजपथ से गुजरने के लिए रक्षा मंत्रालय से मंजूरी लेना जरुरी होता है और कई बार ऐसा होता है कि किसी भी राज्यस की झांकी को किसी न किसी कारण से रक्षा मंत्रालय की मंजूरी नहीं मिलती है।

इस विशेष दिन हर राज्यए की इच्छान होती है कि उसकी सभ्याता, संस्कृैति, इतिहास और विकास की झलक पूरे देश को मिले पर इस बार यूपी की झांकी को ही रक्षा मंत्रालय ने अनुमति नहीं दी। उस वक्त उत्तषर प्रदेश सरकार की झांकी की थीम ‘आस्था् का महापर्व कुंभ’ और इसमें साधु-संतों के कटआउट वगैरह का प्रमुखता से इस्ते माल किया गया था। ऐसे में यूपी की झांकी का परेड में शामिल नहीं होने से मुलायम सिंह तमतमा गए और रक्षा सचिव से पूछा, ‘क्या खराबी है यूपी की झांकी में?’ सकपकाए रक्षा सचिव ने एक्सापर्ट कमिटी की बात दोहराते हुए कहा दिया, ‘सर, उसमें केवल साधू-संत बना दिए हैं।’ इस पर रक्षामंत्री ने आंखें तरेरते हुए कहा, ‘कुंभ में साधू-संत नहीं दिखेंगे तो क्या दिखेंगे? चलो यूपी की झांकी को चयनित झांकियों की लाईन मे लगा दो।’ फिर क्या यूपी की झांकी प्रर्दशन में शामिल भी हुई और पुरस्कृत भी। इस बात को आज लिखने का मकसद महज इतना ही है कि मुलायम सिंह जैसा बड़ा व्यक्तित्व आज की तारीख में तक मिलना मुश्किल है..।

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मुलायम सिर्फ नाम के ही मुलायम नहीं थे वे दिल से मुलायम थे… उनको करीब से जानने वाले जानते हैं कि मुलायम सबंधों को किस हद तक निभाते थे…. दरअसल आज मौका भी है और दस्तूर भी…आज नेताजी का जन्म दिन है। समाजवादी पार्टी के लाखों कार्यकर्ता इसे बेहद उत्साह से मना रहे हैं और उनका बधाई दैना लाजिमी है पर राजनैतिक विचारधार में मुलायम सिंह यादव के धुर विरोधी रहे यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी जब उन्हें सम्मान सहित याद करें तो समझ जाना चाहिए कि उनका कद बहुत बड़ा था और वे सियासी इबारत की दुनिया को काफी पहले लांघ चुके थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें याद करते हुए अपने आधिकारिक पोस्ट में लिखा कि “पूर्व रक्षा मंत्री, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, पद्म विभूषण मुलायम सिंह यादव की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। योगी का यह संदेश उस राजनीतिक संस्कृति का संकेत था जहां विचारधारा और दलगत सीमाओं से परे जाकर सम्मान दिया जाता है।

 

सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं बल्कि यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए नेताजी को याद किया। उन्होंने लिखा कि “समाजवादी पार्टी के संस्थापक एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है ये परंपरा तो चली ही आ रही है पर इससे पहले उनके जीवनकाल में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई भाजपा नेताओं उनके जन्मदिन पर ‘नेता जी’ के अनुभव और व्यक्तित्व की प्रशंसा कर चुके हैं। नेताजी और धरती पुत्र के नाम से विख्यात मुलायम सिंह यादव का जन्म 22 नवंबर 1939 को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई गांव में हुआ। एक साधारण किसान परिवार से आने वाले मुलायम सिंह यादव ने छात्र राजनीति से आगे बढ़ते हुए न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बनाई। मुलायम सिंह पहली बार 1977 में जनता पार्टी सरकार में मंत्री बने और फिर वे अपने सियासी जीवन में अपने तमाम उतार-चढ़ाव लांघते हुए 1989 में पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद साल 1993 में उन्होंने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और फिर 2003 में तीसरी बार प्रदेश की बागडोर संभाली। इस दौरान 1996 से 1998 तक उन्होंने देश के रक्षा मंत्री के रूप में केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। मुलायम सिंह की पहचान एक ऐसे नेता की रही जो जनता के बीच से उठकर आया और जमीनी संघर्ष से सत्ता के शिखर तक पहुंचा।

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बताते चलें कि वर्ष 1992 में मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी की स्थापना की। उस वक्त समाजवादी एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि समाजवादी विचारधारा और सामाजिक न्याय को आगे बढ़ाने वाला आंदोलन बन चुका था मुलायम सिंह समाजवादी चिंतक डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों से बेहद प्रभावित थे और शायद यही कारण रहा कि मुलायम यादव ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में पिछड़े वर्गों, किसानों, मजदूरों और वंचित समाज के अधिकारों की मजबूती से वकालत की। उत्तर प्रदेश की राजनीति में वह एक ऐसा नाम बनकर उभरे जिसे ‘धरतीपुत्र’ कहा जाने लगा। शायद यही कारण है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मुलायम सिंह यादव को श्रद्धांजलि देना ये बता जाता है कि उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गरिमा को बनाए रखने की परंपरा जारी है। सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी सपा के बीच राजनीतिक मतभेद भले हों, लेकिन योगी सरकार ने कई मौकों पर मुलायम सिंह यादव का सम्मान किया है—चाहे वह विधानसभा में श्रद्धांजलि हो या उनकी विरासत का स्मरण। मुलायम सिंह यादव की जयंती पर श्रद्धांजलि केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उस नेता के प्रति सम्मान है जिसने दशकों तक उत्तर प्रदेश और भारत की राजनीति को प्रभावित किया। योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य के संदेश राजनीतिक सौहार्द का प्रतीक हैं। मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक विरासत, संघर्षशीलता और सामाजिक न्याय की वकालत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

 

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