कांग्रेस की अंदरूनी जंग ढाई साल का रोटेशन फॉर्मूला अब बना संकट

Congress
अजय कुमार

कर्नाटक की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से उठ रहा तूफ़ान अब स्पष्ट रूप से दिखाने लगा है कि राज्य की सत्ता के शीर्ष पर खींचतान किस हद तक पहुँच चुकी है। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को प्रचंड जीत मिली थी। कांग्रेस ने 224 में से 135 सीटों पर कब्जा किया था जबकि भाजपा 66 सीटों और जेडीएस 19 सीटों पर सिमट गई थी। जीत के बाद कांग्रेस ने राज्य में सरकार तो बना ली, लेकिन सत्ता के असली खेल की बिसात उसी दिन से बिछनी शुरू हो गई थी, जब मुख्यमंत्री की कुर्सी पर सिद्धारमैया को बिठाया गया और डीके शिवकुमार को डिप्टी सीएम बनाकर इस उम्मीद पर रखा गया कि ढाई साल बाद उनकी बारी आएगी।इसी ढाई साल के रोटेशन फॉर्मूले की घड़ी अब पास आ चुकी है। सिद्धारमैया के कार्यकाल के ढाई साल पूरे होने पर शिवकुमार के समर्थकों ने पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। उनके करीबी विधायकों का बिना पूर्व निर्धारित समय लिए दिल्ली पहुँचना और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलने की कोशिशें इसी दबाव राजनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इस मुलाकात के वायरल हुए फोटो और वीडियो ने कर्नाटक में सियासी उथल-पुथल को और तेज़ कर दिया है।

ये भी पढ़ें

BJP यूपी-बंगाल में भी महिलाओं-युवाओं पर लगाएगी दांव

राज्य में सत्ता परिवर्तन की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने तेवर साफ़ कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक को पाँच साल का जनादेश मिला है और वह पाँच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। उन्होंने मीडिया में चल रही “नवंबर क्रांति” की चर्चाओं को हवा बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में सरकार स्थिर है और अगले साल का बजट भी वही पेश करेंगे। सिद्धारमैया का यह बयान साफ़ दिखाता है कि वह कुर्सी छोड़ने के मूड में नहीं हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिद्धारमैया कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड अपने नाम करना चाहते हैं और उनके लिए यह अवसर बेहद अहम है।दूसरी तरफ शिवकुमार धैर्य के साथ हाईकमान के फैसले का इंतजार करते हुए भी अपनी दावेदारी मजबूत करने का हर अवसर साध रहे हैं। वह वोक्कालिगा समुदाय के सबसे बड़े नेता हैं, दक्षिण कर्नाटक में उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में इस समुदाय के कुछ हिस्सों का रुख भाजपा की ओर दिखा, लेकिन राज्य संगठन में शिवकुमार की पकड़ कम नहीं हुई। वह कांग्रेस के संकटमोचक नेता के तौर पर अपनी अलग पहचान रखते हैं। मध्य प्रदेश, गोवा और गुजरात जैसे राज्यों में कांग्रेस संकटों के दौरान उनकी सक्रियता और रणनीति को पार्टी के भीतर बड़ी ताकत माना जाता है। यही वजह रही कि 2023 कर्नाटक चुनाव से ठीक पहले सीबीआई और ईडी के दबाव के बावजूद वह डटे रहे और चुनावी जीत के बाद सिद्धारमैया के साथ सत्ता की इस नई कहानी की शुरुआत हुई।

ये भी पढ़ें

नई सरकार में क्या नीतीश के कद को छोटा कर सकती है BJP

लेकिन इस कहानी में हमेशा से एक अनकहा संघर्ष रहा, जो अब खुलकर सामने आ चुका है। शिवकुमार का यह कहना कि “कोई भी पद स्थायी नहीं होता, मैं लाइन में पहले नंबर पर हूँ” उनकी महत्वाकांक्षा की खुली घोषणा है। वह लगातार अपने समर्थकों को भरोसा दे रहे हैं कि उनकी बारी आएगी। लेकिन कब आएगी, यही सवाल कर्नाटक की राजनीति को इस समय बेचैन कर रहा है। कांग्रेस हाईकमान अब इस बेचैनी को संभालने में उलझा हुआ है। भाजपा इस पूरी स्थिति को “कांग्रेस का अंदरूनी संकट” बताते हुए हमलावर हो चुकी है। विपक्ष का आरोप है कि सत्ता संघर्ष की वजह से प्रशासनिक कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ठेकेदारों ने दावा किया है कि लगभग 33,000 करोड़ रुपये के भुगतान में देरी हो रही है।

इसका असर विकास परियोजनाओं पर साफ दिखाई देता है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस सरकार पर यह भी आरोप लगाया है कि प्रदेश की जनता को राहत देने की योजनाएँ सिर्फ कागज़ों में चल रही हैं जबकि जमीन पर विकास ठप पड़ा है।कांग्रेस के भीतर बढ़ती बेचैनी का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है।  कि कई विधायक यह मानते हैं कि स्थिति अगर ऐसी ही रही तो 2028 के चुनाव में इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता खुले तौर पर हाईकमान से यह आग्रह कर चुके हैं कि स्थिति स्पष्ट की जाए और मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही रस्साकशी खत्म की जाए। आंतरिक बैठकों में इस बात पर सहमति बनी है कि पार्टी का संदेश एकजुटता का होना चाहिए न कि सत्ता संघर्ष का।

ये भी पढ़े

सात जन्मों की कसम और साथ में सात फेरे लेने वाली दुल्हन सात मिनट में ही छूमंतर, खबर पाकर दुल्हा बेहोश बाराती दंग

सवाल यह भी है कि अगर हाईकमान सिद्धारमैया को हटाने का जोखिम नहीं लेता, तो क्या शिवकुमार सख़्त कदम उठा सकते हैं? उनके बयान अक्सर यह संकेत देते हैं कि वह पार्टी से इतर निर्णय से खुद को नहीं जोड़ते, लेकिन राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं होता। महाराष्ट्र मॉडल की कई बार चर्चा हो चुकी है, जहां सरकारें रातों-रात पलट चुकी हैं। शिवकुमार के भाजपा से बेहतर संबंधों की भी कई बार चर्चा होती रही है। उनके खिलाफ दर्ज मामलों की मौजूदगी और एजेंसियों की सक्रियता को लेकर भी राजनीतिक संकेत निकाले जाते हैं। इसलिए अगर कांग्रेस की इस अंदरूनी लड़ाई में भाजपा अवसर तलाशती है तो यह किसी को चकित नहीं करेगा।कहा जाता है कि सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच समझौता ही कांग्रेस की जीत की नींव था। लेकिन अब वही समझौता कांग्रेस की सत्ता को डस्टेबलाइज़ कर रहा है। हाईकमान के सामने एक तरफ सिद्धारमैया की ओबीसी राजनीति है, तो दूसरी तरफ शिवकुमार की संगठनात्मक पकड़ और वोक्कालिगा वोटबैंक। दोनों नेताओं की अपनी मजबूती और अपनी-अपनी सीमाएँ हैं। ऐसे में किसी भी पक्ष को नाराज़ करना कांग्रेस के लिए जोखिम भरा होगा।

ये भी पढ़े

बस्ती-नई नवेली दुल्हन का दुस्साहस: निकाह के हफ्ता भर गुजरते ही रूखसाना बनी हत्यारिन

बेंगलुरु में हवा यह कह रही है कि आने वाले दिनों में कुछ बड़ा होने वाला है। अगर सिद्धारमैया को हटाया जाता है तो वह इसे अपनी राजनीतिक विरासत के खिलाफ कदम मान सकते हैं और नाराज़गी खुलकर सामने आ सकती है। वहीं अगर शिवकुमार की दावेदारी को टाल दिया गया तो उनके समर्थक इसे वादाखिलाफी मानकर सड़कों पर उतर सकते हैं। कांग्रेस के भीतर उठती यह लहर आने वाले महीनों में सुनामी भी बन सकती है। राज्य की जनता को उम्मीद थी कि प्रचंड बहुमत से मिली सरकार विकास की नई इबारत लिखेगी। लेकिन आज हालत यह है कि राज्य की राजनीति कुर्सी के लिए टकराती दो आकांक्षाओं में उलझी पड़ी है। कांग्रेस हाईकमान के लिए इस संघर्ष को सुलझाना जितना ज़रूरी है, उतना ही मुश्किल भी। कर्नाटक की सत्ता की इस जंग में कौन आगे निकलता है और कौन किनारे होता है   यह फैसला आने वाले कुछ हफ्तों में हो जाएगा। लेकिन इतना तय है कि इस राजनीतिक दांव-पेच ने कर्नाटक में सत्ता के भविष्य को अनिश्चितता की आग में झोंक दिया है।

Spread the love

 UN terrorism stance news
homeslider International

यूएन में बोला भारत- आतंकी सिर्फ आतंकी होता है, खत्म हों दोहरे मापदंड

UN terrorism stance news : संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने वैश्विक मंच पर आतंकवाद और मानवता संकट दोनों मोर्चों पर देश का रुख पुरजोर तरीके से रखा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में यूनाइटेड नेशंस ग्लोबल काउंटर-टेररिज्म स्ट्रैटेजी (जीसीटीएस) के नौवें रिव्यू के दौरान भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए […]

Spread the love
Read More
homeslider National

मोदी और ताकाइची की मुलाकात: AI, सेमीकंडक्टर और आर्थिक साझेदारी पर फोकस

  Japan PM India visit : हैदराबाद हाउस में आयोजित भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के बीच अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। इस दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए कई समझौतों और सहयोग ज्ञापनों (MoC) पर हस्ताक्षर किए गए। बैठक के […]

Spread the love
Read More
Daycare
homeslider National

डेकेयर में मासूमों पर अत्याचार! वॉशिंग मशीन में डालने और बाथरूम में बंद करने के आरोप

Daycare IT  कंपनी के कर्मचारियों के बच्चों की देखभाल के लिए संचालित एक डेकेयर सेंटर में दो से तीन साल के मासूम बच्चों के साथ कथित शारीरिक और मानसिक दुर्व्यवहार का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के आधार पर पुलिस ने पांच महिला देखभालकर्ताओं […]

Spread the love
Read More