डॉक्टरी की आड़ में पांच डॉक्टर बने आतंकी, सरगना निकली महिला डॉक्टर और उसका भाई

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देश की राजधानी दिल्ली में हुए धमाके के बाद एक बार फिर देश व प्रदेश के कोने-कोने में छिपे आतंकियों का सिजरा तैयार करने में जुटी जांच एजेंसियां।

ए अहमद सौदागर

लखनऊ। आतंक के पर्याय बने आतंकियों के नापाक इरादों और चेहरों पर नजर डालें तो पुलवामा निवासी डॉ उमर नबी फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी में काम करता था। डॉ आदिल अहमद राथर जम्मू-कश्मीर के कुलगाम का निवासी है और वह अनंतनाग मेडिकल कॉलेज में नौकरी करता है। राजधानी लखनऊ के मड़ियांव क्षेत्र के IIM रोड स्थित मुतक्कीपुर निवासी डॉ परवेज एरा मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर की पढ़ाई करने के बाद आगरा, सहारनपुर अस्पतालों में नौकरी करने के बाद गुडंबा क्षेत्र स्थित इंटीग्रल यूनिवर्सिटी नौकरी करने लगा कि नौकरी करते-करते वह अचानक ओझल हो गया। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा निवासी डॉ मुजम्मिल फरीदाबाद के अल फलाह यूनिवर्सिटी में बतौर शिक्षक के पद पर कार्यरत रहा। लखनऊ की रहने वाली महिला डॉक्टर शाहीन आतंकी डॉक्टर मुजम्मिल की घनिष्ठ मित्र मानी जाती है और वह भी फरीदाबाद के अल फलाह यूनिवर्सिटी में नौकरी करती है। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा निवासी डॉ सज्जाद अहमद मला भी अल फलाह में ही पढ़ाता था और आतंकी उमर का मित्र था। खबर के ऊपर दर्शाए गए ये पांचों नाम कुछ दिनों पहले डॉक्टर साहब कहकर बुलाए जाते थे, लेकिन इनके नापाक इरादों ने अब उन्हें आतंकी कहने के लिए लोगों को मजबूर कर दिया।

सूत्र बताते हैं कि ये पांचों डॉक्टरों की भूमिका पर पहले से संदेह के घेरे में रहे, लेकिन उन्हें कोई भांप नहीं पा रहा था। जैसे ही एटीएस और जांच एजेंसियों ने इनके पास से भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा बरामद किया तो लोगों को अंदाजा नहीं था कि ये पांचों डॉक्टरों ने आतंकी संगठनों का दामन थाम कर देश के साथ गद्दारी करेंगे। इन खूंखार चेहरों का सुबूत उस दिन और पुख्ता हो गया, जब इनका साथी आतंकी डॉक्टर उमर सोमवार को देश की राजधानी दिल्ली के लाल किला मैट्रो स्टेशन के पास बम ब्लास्ट कर दर्जन भर बेगुनाहों की जान ले ली। फरीदाबाद से लखनऊ तक इलाकों में लोगों की जुबान से अब यही चर्चा का विषय बना हुआ है डॉ के बावजूद कौन-सी ऐसी मजबूरी की यह सभी पांचों डॉक्टर आखिर क्यों देश के लिए दुश्मन बन गए। जांच एजेंसियां कुछ भी दावा करें देश के दुश्मनों की जड़ें पहले से मजबूत रही, दिल्ली से पहले भी कई आतंकी अपना आतंक मचा चुके हैं, कुछ धरे गए तो कुछ अभी भी एटीएस के लिए नासूर बने हुए हैं।

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  2. 13 फरवरी 2010 :  पुणे में जर्मन बेकरी के बाहर हुए बम धमाके में 17 लोगों की मौत हुई, 60 घायल
  3. 26 नवंबर 2008 : देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आतंकियों के हमले में 166 लोग मारे गए।
  4. 30 अक्टूबर : असम में किए गए 18 विस्फोट में 77 लोग मारे गए, 100 घायल
  5. 21 अक्टूबर : इंफाल में मणिपुर पुलिस कमांडो कांप्लेक्स के पास शक्तिशाली विस्फोट, 17 लोगों की मौत
  6. 29 सितंबर : महाराष्ट्र के मालेगांव में भीड़भाड़ वाले इलाके में बम विस्फोट में पांच लोग मारे
  7. 29 सितंबर : गुजरात के मोदासा में बम विस्फोट, एक की मौत
  8. 27 सितंबर : दिल्ली के महरौली में विस्फोट, तीन लोग मारे गए।
  9. 13 सितंबर : दिल्ली में छह स्थानों पर हुए सीरियल बम ब्लास्ट में 26 लोग मारे गए।
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  14. अक्टूबर 2007 : रमजान के दौरान अजमेर शरीफ दरगाह में हुए धमाके में दो लोग मारे गए।
  15. अगस्त : हैदराबाद में हुए आतंकी हमले में 30 लोग मारे गए, जबकि 60 घायल हुए।
  16. मई : हैदराबाद की मक्का मस्जिद में हुए बम धमाके में 11 लोग मारे गए।
  17. 19 फरवरी : समझौता एक्सप्रेस में दो बम धमाकों के बाद लगी आग 66 यात्री मारे गए।
  18. सितंबर 2006 : मालेगांव की एक मस्जिद में दो बम धमाकों में 30 लोग मारे गए, जबकि 100 लोग घायल हुए।
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