- हो गया साफः केवल जातीय समीकरण साधने के लिए छोटे दलों को साथ रखकर चलती है बीजेपी
- यूपी में संजय निषाद, अनुप्रिया पटेल और ओमप्रकाश राजभर की पार्टियां भी बीजेपी के ही सहारे
हिमांशु सिंह
बिहार में वोटो की गिनती जारी है। NDA पूरे रंग में है और उनके छोटे-छोटे दल भी जीत की ओर आगे बढ़ रहे हैं। इस चुनाव में जीतनराम मांझी से लेकर लोक जनशक्ति पार्टी के चिराग पासवान तक का ग्राफ तेजी से ऊपर की ओर बढ़ रहा है। वहीं महागठबंधन के साथ कदमताल करने वाली कई पार्टियों का सूपड़ा साफ हो गया तो कई पार्टियों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा। मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी से लेकर, तेज प्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल का भी खाता नहीं खुला। खबर लिखे जाने तक जोर-शोर से आई भारत में रणनीतिकार के नाम से मशहूर प्रशांत किशोर ‘पीके’ की पार्टी भी शून्य पर बोल्ड हो गई। वहीं 30 सीटों में 21 पर चिराग रोशन हो गई। मांझी की किस्ती भी पांच सीटों पर पार हो गई।
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एक महीने तक बिहार विधानसभा चुनाव अपने पूरे रंग में रहा। पिछले महीने चार-पांच अक्टूबर को पटना पहुंचे भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सियासी दलों के अलावे अफसरों, बीएलओ वगैरह से गहन विचार-विमर्श किया। उनके संग चुनाव आयुक्त भी थे। आसन्न इलेक्शन में राष्ट्रीय पार्टियां, क्षेत्रीय पार्टियां जो पहले से रजिस्टर्ड हैं वे तो शिरकत कर ही रही हैं, लगे हाथ कुछ नई पार्टियां भी अबकी बार अपना मुकद्दर आजमाने को तैयार हैं। प्रशांत किशोर की ‘जनसुराज’ पार्टी यूं तो पूर्व में लोकसभा, विधानसभा समेत विधानपरिषद का चुनाव लड़ चुकी है, मगर इस होनेवाली सियासी महाभारत में पीके ने कुल 238 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे।

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उधर लालू यादव के बड़े साहबजादे तेजप्रताप यादव ने ‘जनशक्ति जनता दल’ का गठन किया है और उन्हें ‘ब्लैकबोर्ड’ ‘चुनाव चिन्ह भी बाकायदे आवंटित था। तेज प्रताप ने तो पहले ही दो-तीन सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान भी कर दिया था। गौरतलब है कि मई 2025 में लालू यादव ने तेजप्रताप को अनुष्का प्रकरण के कारण पार्टी और घर दोनों से निकाल दिया था। हालांकि उत्तर प्रदेश के चंद्रशेखर रावण ने अपनी पार्टी को बिहार के रण में नहीं उतारा, लेकिन वो भी चुनाव के पहले बड़ा-बड़ा दावा करते रहे।

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पूर्वांचल में खुद को बड़ा नेता बताने वाले और उत्तर प्रदेश में योगी काबीना के सदस्य सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के सुप्रीमो ओमप्रकाश राजभर भी 7-10 कांस्टीच्यूरंडियों में जोर-आजमाइश करना चाहते थे। आईपी गुप्ता जो कभी बिहार कांग्रेस की शोभा बढ़ाते थे, उन्होंने कांग्रेस को अलविदा कर ‘इंडियन इंकलाब पार्टी’ की बुनियाद डाल रखी है। वे अखाड़े में कूदे, दांव भी लगाएं, लेकिन उनका क्या हश्र हुआ, वो किसी से छुपा नहीं है।

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