TET बनी गलफांस: अब 21 को हुंकार भरेंगे शिक्षक, जानें क्यों उठाना पड़ा यह कठोर कदम

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  • देशभर के शिक्षक 21 नवम्बर को राजधानी दिल्ली में करेंगे महारैली

नया लुक ब्यूरो

लखनऊ। पहले BEd के आधार पर शिक्षक की नौकरी पा चुके लोगों के ऊपर छटनी का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इसी खतरे के खिलाफ सभी ने एक जुट होकर हुंकार भरने की कोशिश की है। इसे अमलीजामा पहनाने का कार्य शिक्षकों ने 21 नवम्बर को पूरा करने का फैसला किया है। इसके माध्यम से 27 जुलाई 2011 से पहले के नियुक्त शिक्षकों को TET से मुक्त रखने की मांग करेंगे। मिली जानकारी के मुताबिक देश भर के परिषदीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य किए जाने के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की घोषणा कर दी गई है। देश भर के शिक्षक 21 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में महारैली करेंगे।

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लखनऊ के पदाधिकारियों ने दिल्ली की बैठक में यह निर्णय लिया। यूपी के डॉ. दिनेश चंद्र ने बताया कि टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) ने यह फैसला किया है। गौरतलब है कि डॉ चंद्रा को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। उन्होंने कहा कि संगठन के इस निर्णय के सम्मान में हम बड़ा हल्ला बोल करने जा रहे हैं।

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उन्होंने बताया कि यह निर्णय नौ राज्यों के शिक्षक संगठनों द्वारा TFI की पिछले दिनों शनिवार को राजधानी के कांस्टीट्यूशन क्लब में हुई एक बैठक में लिया गया। बैठक में पहले संगठन के राष्ट्रीय पदाधिकारियों का चुनाव हुआ। इसमें उत्तर प्रदेश के डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा राष्ट्रीय अध्यक्ष, झारखंड के राम मूर्ति ठाकुर महासचिव, संजय सिंह वरिष्ठ उपाध्यक्ष, शिवशंकर पांडेय कोषाध्यक्ष व देवेंद्र श्रीवास्तव संयुक्त महासचिव चुने गए। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शर्मा ने कहा कि साल 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर TET  की अनिवार्यता लागू करना न्याय के सिद्धांत के विपरीत है। पूरे देश का शिक्षक इसके खिलाफ हैं। इसलिए 27 जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से मुक्त रखने के लिए देश भर के शिक्षक 21 नवंबर को दिल्ली में महारैली कर केंद्र सरकार को ज्ञापन देंगे।

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