- सांसद प्रियंका गांधी ने PM पर उठाया सवाल कहा, ‘महिलाओं का अपमान कैसे होने दिया’
- सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया, देश भर के मीडिया में हैरानी, ट्रेंड रही है यह घटना
- सांसद महुआ मोइत्रा ने भी उठाए सवाल कहा, ‘सरकार ने ऐसे कार्यक्रम की अनुमति क्यों दी’
नई दिल्ली। अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी की दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। पत्रकारों के इस कार्यक्रम में महिला पत्रकारों को ही प्रवेश निषेध कर दिया गया, इस घटना से देश भर की मीडिया हैरान है। इस घटना का हैरान करने वाला पहलू ये है कि इस घटना के बाद भी पुरुष पत्रकारों ने बगैर कोई विरोध जताए पत्रकार वार्ता में हिस्सा लिया। वहीं राजनीतिक हलकों में और सोशल मीडिया पर भारत जैसे देश में इस तरह के प्रतिबंध पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। इस विवाद के बाद सबसे कड़ी प्रतिक्रिया कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी की आयी है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से पूछा है कि ‘ भारत में हमारे ही देश की कुछ सबसे सक्षम महिलाओं का अपमान कैसे होने दिया गया, जबकि महिलाएं ही देश की रीढ़ और गौरव है’।
वहीं टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रया जताई है। उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमारी सरकार ने ऐसा कैसे होने दिया ? सांसद महुआ मोइत्रा ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को निशाने पर लेते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, ‘ भारत सरकार ने तालिबान के विदेश मंत्री आमिर मुत्तकी को महिला पत्रकारों को बाहर रखकर सिर्फ पुरुषों के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की इजाजत कैसे दी? जयशंकर जी ने इस पर सहमति देने की हिम्मत कैसे की? हमारे तथाकथित बहादुर पुरुष पत्रकार कमरे में बैठे क्यों रहे ? महिला पत्रकारों को प्रवेश से क्यों रोका गया?

दिल्ली स्थित अफगानिस्तान दूतावास में शुक्रवार अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी की प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी गई थी। हंगामा तब हुआ जब वहां पहुंची महिला पत्रकारों को अंदर जाने से रोक दिया गया। सभी महिला पत्रकार निर्धारित ड्रेस कोड का पालन कर रही थीं, फिर भी उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया। इस घटना के बाद कई पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर इसे भारत की गरिमा और प्रेस की स्वतंत्रता पर चोट बताया।
बता दें कि आमिर खान मुत्तकी तालिबान सरकार के वरिष्ठ नेता हैं और अफगानिस्तान के विदेश मंत्री के पद पर हैं। तालिबान ने अपने देश में महिलाओं की शिक्षा और काम करने के अधिकार पर सख्त प्रतिबंध लगा रखे हैं। तालिबान के मानवाधिकार रिकॉर्ड और आतंकी संगठनों से संबंधों को देखते हुए भारत अब तक अफगानिस्तान के साथ अपने राजनयिक संबंधों को लेकर सतर्क रुख अपनाता रहा है पर अब भारत सरकार के बदले रुख के बाद अफगानिस्तान भारत को करीबी दोस्त की तरह देखने लगा है। सरकार काबुल में अपना दूतावास खोलने पर भी विचार कर रही है। वहीं, विवाद बढ़ने पर देश के विदेश मंत्रालय ने पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि अफगानिस्तान के विदेश मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनका कोई रोल नहीं था। उनकी तरफ से न तो पत्रकारों को नहीं बुलाया गया था। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस अफगानी दूतावास में हुई थी।
