- सुरागों के पीछे-पीछे भागती खाकी फिर भी नहीं थम रहीं घटनाएं
- पुलिस के हाथ नहीं लग रहे कानून को चुनौती देने वाले
ए अहमद सौदागर
आठ सितंबर : गोमतीनगर के विराम खंड पांच निवासी शांति लता घर दूध लेने निकलीं कि कुछ दूरी पर लुटेरों ने झपट्टा मारकर चेन छीन ली।
नौ सितंबर : गुडंबा क्षेत्र के जानकीपुरम के तिवारी चौराहा के पास रहने वाले प्रमील कुमार पांडेय पत्नी ममता के साथ टेढ़ी पुलिया की ओर जा रहे थे इसी दौरान लुटेरों ने ममता के गले से चेन छीनकर भाग निकले।
20 सितंबर : गुडंबा क्षेत्र के कुर्सी रोड स्थित चार नंबर चौराहे पर शनिवार सुबह एक दिल-दहलाने वाली घटना हुई। बदमाशों ने 40 वर्षीय अतुल कुमार जैन के गले से झपट्टा मारकर चेन लूट ली। अतुल कुमार स्कूटी से पकड़ने के लिए पीछा किया, लेकिन लुटेरों स्कूटी में टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई।
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20 सितंबर : पीजीआई क्षेत्र के वृन्दावन कालोनी निवासी मेडिकल अधिकारी अंजनी कुमार की पत्नी निधि गौतम के गले से दो चेन लुटेरों ने उनके गले से चेन लूट कर भाग निकले। यह तो महज बानगी भर है इससे पहले भी राजधानी लखनऊ में बाइक सवार चेन लुटेरों ने कई लूट की घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। कमिश्नरेट पुलिस ने कुछ घटनाओं का खुलासा किया तो कुछ अभी पुलिस की फाइलों में गोते लगा रही है। चेन लुटेरे मनबढ़ तो पहले ही थे अब बेखौफ हो गए हैं। अपराधियों ने एक सप्ताह के भीतर ताबड़तोड़ वारदात कर कई महिलाओं के गले से चेन छीनी, जबकि गुडंबा क्षेत्र में अतुल कुमार जैन की स्कूटी में टक्कर मारकर उन्हें मौत की नींद सुला दिया। पुलिस अभी तक आतंक का पर्याय बने चेन लुटेरों के सुरागों के पीछे भाग रही है। सुबह-शाम और रात के हर प्रहर में लूटपाट कर अपराधियों ने पुलिस को खुली चुनौती दे डाली, लेकिन कड़वा सच यह है कि पुलिस इन पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रही है।
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पुलिस अपराधों पर अंकुश लगाने में पहले ही नाकाम साबित हो रही थी, लेकिन राजधानी लखनऊ की कमिश्नरेट पुलिस को अपराधियों ने सिलसिलेवार सलामी ठोंकना शुरू कर दिया है। बीते बीस सितंबर 2025 यानी शनिवार को गुडंबा क्षेत्र के कुर्सी रोड पर जिस तरह से बदमाशों ने घटना को अंजाम देकर एक व्यक्ति को कुचला इससे साफ है कि अब बदमाशों के भीतर पुलिस का खौफ नहीं रह गया है। पुलिस अपने बूते अपराधियों को दबोचने में लगातार नाकाम रही। उसकी ढिलाई की बानगी गुडंबा क्षेत्र सहित राजधानी लखनऊ के अन्य थाना क्षेत्रों में हुई लूट से ही मिलनी शुरू हो गई थी। फिलहाल पुलिस के आलाधिकारी भले ही तरह-तरह की बयानबाजी करते फिर रहे हों लेकिन कड़वा सच यह है कि उनके अधीनस्थ अपराध और अपराधियों को पकड़ने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
