अर्थव्यवस्था में सुधार के पक्षधर पूर्व प्रशासक रामेश्वर खनाल को मिला वित्त मंत्री का प्रभार

Untitled 6 copy 13

उमेश चन्द्र त्रिपाठी

काठमांडू। आर्थिक सुधारों के पक्ष में लगातार लगे हुए पूर्व वित्त सचिव रामेश्वर खनाल को सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने वित्त मंत्री का प्रभार दिया है। अर्थव्यवस्था में मौजूद कमियों और कमजोरियों से पूरी तरह वाकिफ खनाल को अब अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी मिली है। अपने सरकारी जीवन का अधिकांश समय वित्त मंत्रालय में बिताने वाले खनाल ने 15 भदौ 2065 से 30 चैत 2067 (नेपाली कैलेंडर) तक वित्त मंत्रालय में सचिव के रूप में काम किया। इससे पहले, उन्होंने 23 सावन 2063 से मंत्रालय के राजस्व सचिव के रूप में काम किया था। सचिव के रूप में खनाल ने डॉ. रामशरण महत, डॉ. बाबूराम भट्टराई, सुरेंद्र पांडे और भरत मोहन अधिकारी जैसे मंत्रियों के साथ काम किया। भरत मोहन अधिकारी के मंत्री रहते हुए, जब उन्हें पता चला कि बजट निर्माण का काम मंत्रालय के बाहर हो रहा है, तो खनाल ने सचिव पद से इस्तीफा दे दिया था।

मंत्रालय में संयुक्त सचिव रहते हुए, खनाल ने बजट और कार्यक्रम प्रभाग और विदेशी सहायता समन्वय प्रभाग के प्रमुख सहित कई जिम्मेदारियां संभाली थीं। अब वह अर्थव्यवस्था की बागडोर संभालने के लिए वापस आए हैं। उच्च-स्तरीय आर्थिक सुधार आयोग के संयोजक के रूप में, उन्होंने कुछ समय पहले अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए जो सुझाव दिए थे, अब उन्हें खुद ही लागू करने का मौका मिला है। खनाल के नेतृत्व में उच्च-स्तरीय आर्थिक सुधार आयोग ने पिछले साल अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। उस रिपोर्ट को लागू करने के लिए पिछली सरकार ने मौद्रिक नीति, ब्याज दर, विनिमय दर, मुद्रास्फीति, संस्थागत, कानूनी और नीतिगत सुधार, सार्वजनिक खर्च, राजस्व, सार्वजनिक ऋण, सार्वजनिक संस्थान, सामाजिक सुरक्षा, बैंकिंग, बीमा, पूंजी बाजार, सहकारी, वैकल्पिक वित्त, व्यापार और निवेश का माहौल बनाना, कृषि, वन, भूमि और खदानें, निर्माण-संबंधी सामग्री का स्थायी और पर्यावरण-अनुकूल उत्खनन, जलविद्युत विकास, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, भौतिक बुनियादी ढांचा विकास, शहरी विकास, ऊर्जा विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रवासन और युवा पलायन, अनुसंधान और विकास से संबंधित विषयों को शामिल करके एक कार्य योजना बनाई थी।

अब उसी कार्य योजना को लागू करने की जिम्मेदारी खनाल के कंधों पर आई है। खनाल के सामने जेन-जी आंदोलन से क्षतिग्रस्त हुई अर्थव्यवस्था को सुधारने की चुनौती भी है। उन्हें पिछली सरकार द्वारा लाए गए बजट को लागू करना होगा, और संसाधनों का प्रबंधन करके क्षतिग्रस्त इमारतों को फिर से खड़ा करना होगा। आंदोलन के कारण बड़ी समस्या में आए निजी क्षेत्र का मनोबल बढ़ाने के लिए आर्थिक पैकेज लाने की जिम्मेदारी भी खनाल की है। सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त नेपाल, जो जेन-जी की मांग है, उसे भी खनाल को अपने कार्यकाल में पूरा करना होगा।

Spread the love

New York
International

IBSA व ‘ग्लोबल साउथ’ संग भारत का साझा संकल्प

शाश्वत तिवारी New York: संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र के इतर न्यूयॉर्क में भारत की कूटनीतिक सक्रियता लगातार नए आयाम छू रही है। कैरिकॉम और फिपिक वार्ताओं के बाद, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक मंच पर ‘ग्लोबल साउथ’ की प्राथमिकताओं और एक मजबूत बहुपक्षीय व्यवस्था को रेखांकित करने वाली दो और […]

Spread the love
Read More
New York
International

कैरिकॉम, फिपिक बैठकों में भारत का कैरेबियाई-प्रशांत देशों संग सहयोग पर जोर

शाश्वत तिवारी New York: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के इतर न्यूयॉर्क में भारत की कूटनीतिक सक्रियता निरंतर जारी है। इसी क्रम में  विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की अध्यक्षता में दो अत्यंत महत्वपूर्ण बहुपक्षीय बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों ने कैरेबियाई और प्रशांत महासागरीय द्वीप देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय व […]

Spread the love
Read More
Gold vs Silver
Business homeslider International

सोना या चांदी? US-ईरान तनाव के बीच किसमें निवेश का मौका

 Gold vs Silver: US-ईरान तनाव के बीच सोना खरीदें या चांदी? किसमें ज्यादा फायदा, जानें एक्सपर्ट की राय Gold vs Silver : US-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच सोने और चांदी की कीमतों में भी अस्थिरता देखने को मिल रही है। ऐसे में निवेशकों के सामने सवाल है कि मौजूदा […]

Spread the love
Read More